मध्य प्रदेश के संजय टाइगर रिजर्व में तैनात खोजी डॉग ‘अपोलो’ वन्यजीव अपराधों के खिलाफ वन विभाग का एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साथी बन गया है। अवैध कटाई, शिकार और वन्यजीव तस्करी जैसी चुनौतियों के बीच अपोलो अपनी सूंघने की क्षमता से अपराधियों का पता लगाने
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वर्ष 2017 में भोपाल की 23वीं बटालियन से संजय टाइगर रिजर्व को सौंपे जाने के बाद से अपोलो ने 90 से अधिक मामलों में लगभग 300 आरोपियों को पकड़वाने में अहम भूमिका निभाई है। इनमें वन्यजीव शिकार, लकड़ी तस्करी और अन्य संदिग्ध गतिविधियां शामिल हैं, जहां उसने जांच को सही दिशा दी।
खोजी डॉग ‘अपोलो’ 2 बार राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार से सम्मानित
अपनी उत्कृष्ट क्षमता और कार्यशैली के लिए अपोलो को दो बार राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान संजय टाइगर रिजर्व और वन विभाग के लिए गौरव का विषय है।
वन विभाग अपोलो की विशेष देखभाल करता है। उसके लिए निर्धारित आहार, नियमित मेडिकल चेकअप और अन्य सुविधाओं की खास व्यवस्था है।
वनरक्षक बोले- अपोलो की फिटनेस और आहार में नहीं होती लापरवाही
वनरक्षक गगन सिंह ने बताया कि अपोलो के भोजन और दिनचर्या में कोई लापरवाही नहीं बरती जाती। गर्मियों में उसे आइसक्रीम और सर्दियों में उच्च प्रोटीन वाला आहार दिया जाता है, ताकि उसकी ऊर्जा और सूंघने की क्षमता हमेशा बेहतर बनी रहे।
सीसीएफ अमित दुबे के अनुसार, अपोलो ने अपराध नियंत्रण की गति और सटीकता को नई दिशा दी है। विभाग की योजना है कि भविष्य में ऐसे और डॉग स्क्वॉड तैयार किए जाएं, जिससे वन्यजीव संरक्षण को और मजबूती मिल सके।