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Indore Five Successful Businesswomen Story: इन महिलाओं कठिन संकल्प से साबित किया है कि वे हर काम को बखूबी कर सकती हैं. शुद्ध डेयरी उत्पाद से लेकर बुटीक, IT और हेवी मशीन टूल्स के उद्योग तक यहां की महिलाओं ने अपना लोहा मनवाया है.
महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं. हर जगह वे कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं. मेहनत से बुलंदियों को छूते हुए अपने दम पर पहचान बना रही हैं. मध्य प्रदेश की औद्योगिक नगरी इंदौर की महिलाएं भी किसी से काम नहीं हैं. यहां की कुछ महिलाओं के बारे में आज आपको बताएंगे, जिन्होंने खुद का व्यवसाय शुरू किया. अब उसमें सफलता का परचम लहरा रही हैं.

इन महिलाओं कठिन संकल्प से साबित किया है कि वे हर काम को बखूबी कर सकती हैं. शुद्ध डेयरी उत्पाद से लेकर बुटीक, IT और हेवी मशीन टूल्स के उद्योग तक यहां की महिलाओं ने अपना लोहा मनवाया है. ये महिलाएं न केवल अपने उद्यम चला रही हैं, बल्कि सैकड़ों महिलाओं और कारीगरों को रोजगार भी दे रही हैं.

जेस्मीन लुल्ला ने बेकरी उद्योग में एक बड़ा नाम बनाया है. उन्होंने रीवा केक्स एंड क्राफ्ट्स की शुरुआत घर से बेकरी उत्पाद बनाने से की थी. उनके उत्पादों की गुणवत्ता और बढ़ती मांग ने उन्हें एक छोटे से आउटलेट से शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया. आज, रीवा केक्स एंड क्राफ्ट्स के देश भर में 16 से अधिक आउटलेट्स हैं, जिनमें इंदौर के अलावा उज्जैन, देवास, अहमदाबाद और राजमुंदरी जैसे शहर शामिल हैं. 2012 में शुरू हुआ उनका यह प्रयास न केवल एक सफल व्यवसाय है, बल्कि जेस्मीन के लिए यह ऊर्जा और प्रेरणा का माध्यम भी है.
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शिखा और उनकी सहयोगी निहारिका जायसवाल ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है. उन्होंने साबित कर दिया कि कुछ काम जिन्हें माना जाता है कि पुरुष ही कर सकते हैं, वह महिलाएं भी कर सकती हैं. वेट टूल्स और मशीनरी उद्योग में लंबे समय से काम कर रही हैं. इनकी कंपनी साईं मशीन टूल्स कटलरी, हैंड टूल्स और जनरल हार्डवेयर के निर्माण के क्षेत्र में काम करती है. इन्हें राज्य सरकार द्वारा सम्मानितभी किया जा चुका है

इंदौर की डॉ. दिव्या गुप्ता एक सॉफ्टवेयर फॉर्म चलाती हैं, जिसमें वह कस्टमाइज ई-कॉमर्स सॉल्यूशन और डिजिटल मार्केटिंग सर्विसेज देती हैं. उन्होंने कहीं छोटे मध्य व्यवसाय को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अपने व्यापार को बढ़ाने में मदद की है. साथ ही वह महिलाओं को आईटी क्षेत्र में बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रोत्साहित करती रहती हैं.

शांता डेयरी फार्म्स की पल्लवी व्यास ऑर्गेनिक दूध और डेयरी में एक जाना माना नाम बन चुकी हैं. 2016 में उनके द्वारा शुरू की गई इस कंपनी का उद्देश्य शुद्ध और रासायनिक मुक्त दूध उपलब्ध कराना था. शुरुआती मुश्किलों के बावजूद उन्होंने पति के सहयोग और मजबूत इरादे से 35 एकड़ जमीन पर फार्म शुरू किया, जो अब 50 एकड़ में फैल चुका है. आज उनकी फार्म प्रतिदिन 1000 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन करती है और इसका वार्षिक टर्नओवर लगभग ₹5 करोड़ है.

पिको फॉल की छोटी सी दुकान चलाने वाली शीला हार्डिया ने अपनी मेहनत और दूर दृष्टि से दुकान को बुटीक में बदलकर उसे ब्रांड बनाया है. उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन जज्बा कम नहीं था. उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना की मदद से 2 लाख का लोन लिया और वहीं डिजाइनर कपड़ों का बुटीक डाला. आज वह अपने इस बुटीक के माध्यम से कई महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं.