भोपाल6 मिनट पहले
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बिड़ला मंदिर में स्क्रीनिंग के बाद प्रवेश
- कोरोनाकाल के चलते बदली व्यवस्था… विशेष अवसरों पर पुजारी ही करते हैं भगवान का शृंगार, त्योहारों पर भी नहीं हुए उत्सव
- बड़े मंदिरों में रोज दर्शन के लिए 700-800 लोग आतेे थे, अब यह संख्या 200 के आसपास ही रह गई
कोरोनाकाल में जबसे मंदिर खुले हैं, उनमें पहुंचने वालों की संख्या में भारी कमी आई हैं। बड़े मंदिरों में रोज 700-800 लोग पहुंचते थे, अब यह संख्या सिर्फ 200 के आसपास ही रह गई है। ऐसा नहीं है कि लोगों की आस्था में कोई कमी आई है, बल्कि महामारी से बचाव के लिए ज्यादातर लोगों ने घरों में पूजा-प्रार्थना करने की आदत बना ली है, जो भगवान के लिए पहले हार-फूल और प्रसाद ले जाते थे, उनमें ज्यादातर लोग अब खाली हाथ जाते हैं।
व्यवहार में एक बड़ा बदलाव यह आया है कि मंदिर में किसी परिचित के मिलने पर वे उससे दूरी बनाकर अब केवल राम-राम या नमस्ते करने तक ही स्वयं को सीमित रखते हैं। मंदिरों में आने वाली दान-दक्षिणा में भी करीब 75 फीसदी की कमी आई है। व्यवस्थापकों का कहना है कि भगवान तो भाव के भूखे हैं, चढ़ावे के नहीं। कई मंदिरों में बड़े उत्सव नहीं किए जा रहे हैं। त्योहारों पर भगवान का विशेष शृंगार व अभिषेक केवल पंडितों द्वारा ही किया जाता है।
बिड़ला मंदिर…स्क्रीनिंग के बाद प्रवेश
लक्ष्मीनारायण (बिड़ला) मंदिर में इन दिनों सुबह 7 से 11 बजे के बीच 50 या 60 लोग जबकि शाम को 80 से 100 लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्रबंधक केके पांडे ने बताया कि थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही श्रद्धालुओं प्रवेश दिया जाता है। हार-फूल व प्रसाद नहीं लिया जा रहा हैं। दान राशि व चढ़ावा में भी कमी आई है। पहले जहां हर माह दान स्वरूप दो से ढाई लाख रुपए प्रति माह आते थे, वहीं अब पिछले पांच माह में कुल साढ़े तीन लाख से भी कम राशि का चढ़ावा आया है। हार-फूल की दुकानें भी पांच माह से बंद हैं।
गुफा मंदिर.. जहां दुकानें खुलीं, वहां ग्राहक नहीं

गुफा मंदिर के पुजारी पं. लेखराज शर्मा ने बताया कि पहले सुबह 6 से रात 11 बजे तक भक्तों की संख्या एक हजार से अधिक होती थी। परंतु अब यह तीन-चार सौ रह गई है। मंदिर में किसी को भी प्रसाद चढ़ाने व मूर्ति स्पर्श की अनुमति नहीं है। अब बहुत कम लोग प्रसाद लाते है, जिसे दूर ही रखवाकर वापस कर देते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग में अब ज्यादा दिक्कत नहीं होती है।
बड़वाले महादेव ..परिक्रमा मार्ग बंद
बटेश्वर महादेव मंदिर सेवा समिति के संजय अग्रवाल ने बताया कि गर्भगृह में जाने की किसी को अनुमति नहीं है। हार-फूल प्रसाद भी कम लोग लाते हैं। वे उसे भगवान के समक्ष रखकर बिना चढाएं वापस ले जाते हैं। परिक्रमा का रास्ता बंद कर दिया है। बिना सोशल डिस्टेंसिंग जो लोग खड़े हो जाते हैं, उन्हें अगले दिन से ऐसा नहीं करने की हिदायत भी देते हैं।
कर्फ्यू वाली माता.. प्रसाद चढ़ाने की व्यवस्था नहीं

कर्प्यू वाली माता मंदिर सोमवारा में भी भक्तों की संख्या में कमी आई है। मंदिर समिति के अध्यक्ष रमेश सैनी ने बताया कि कई लोग मंदिर के बाहर से ही भगवान को नमन कर चले जाते हैं। मंदिर में किसी को भी स्वयं प्रसाद चढ़ाने की व्यवस्था पहले से ही नहीं है। बिना मास्क बहुत कम लोग आते हैं।
काली मंदिर… चढ़ावा आधे से भी कम
कालिका मंदिर पुल पुख्ता के रजनीश बगवार ने बताया कि मां के दरबार के समक्ष रेलिंग लगाई गई है। लोग एक-दूसरे के पीछे सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखकर ही पहुंचते हैं। महिलाओं के खड़े रहने की व्यवस्था अलग की गई है। यहां मंदिर का हाॅल बड़ा है। महामारी के चलते भक्तों की संख्या में भारी कमी आई है। मंदिर में चढ़ावा भी घटकर आधे से कम रह गया है।
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