Last Updated:
Sagar DAP Fertiliser Crisis: मध्य प्रदेश में डीएपी-यूरिया का भारी संकट, सागर मंडी से किसानों की दर्दभरी ग्राउंड रिपोर्ट घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी नहीं मिल रही खाद, फसल पर संकट.
दिसंबर का महीना शुरू हो गया है और किसान अभी भी डीएपी यूरिया खाद के लिए लाइन में लगा हुआ है. जिस समय उसे अपनी फसलों को संभालने के लिए सिंचाई करनी चाहिए, खेत में होना चाहिए़, खाद का छिड़काव करना चाहिए, उस बेस कीमती समय में वह टोकन की चाहत में सब कुछ छोड़-छाड़ के घंटों धूप में खड़ा रहता है, सागर कृषि उपज मंडी के डबल लॉक खाद वितरण केंद्र पर भी यही हाल है जहां सुबह से सैकड़ो किसान बड़ी उम्मीदें लेकर पहुंच जाते हैं और शाम को निराश होकर लौट आते हैं क्योंकि खाद की शॉर्टेज होने की वजह से किसानों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रहा है एक बंदी पर केवल दो बोरी खाद ही दिया जा रहा है ऐसे में किसान परेशान हूं यहां तक की महिलाएं और स्कूल कॉलेज जाने वाली बेटियां भी खाद की लाइन में लगी हुई है.
बता दें कि इस बार मक्का का रकवा बढ़ने की वजह से रवि के सीजन में बुआई लेट हो गई है. और किसान चाह रहे हैं की अब जो कम दिनों में तैयार होने वाली अनाज की वैरायटी है उनकी बुवाई की जाए लेकिन इन्हें पर्याप्त खाद की जरूरत होती है नहीं तो लागत ही नहीं निकल पाएगी
किधर जिन किसानों ने बुवाई कर दी थी उनकी फसल 15 से 21 दिन की हो गई है खासकर गेहूं की फसल में एक सिंचाई के बाद यूरिया का छिड़काव करना पड़ता है लेकिन खाद मिल नहीं रहा है ऐसे में अगर फसल को उर्वरक नहीं मिला तो उपज प्रभावित होगी और किसान मुनाफे की उम्मीद के साथ खेती कर रहा है उसमें निराशा मिलेगी.
सत्ताधाना नरयावली से आए राजेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि उनकी 25 एकड़ जमीन है कुछ जमीन में उन्होंने डीएपी के साथ बुआई की है, जबकि आदि खेती बिना उर्वरक की बुवाई कर दी ऐसे में अब जब पहली यूरिया का छिड़काव करेंगे तो उसमें डीएपी मिक्स करना पड़ता है लेकिन डीएपी के लिए पिछले 4 दिन से आ रहे हैं आज जाकर टोकन मिला है और अब खाद कब मिलेगा कुछ कह नहीं सकते.
गिद्वानी से आए वीर सिंह ने बताया कि आजकल खेती ऐसी हो गई है कि जब तक उसमें डीएपी और यूरिया नहीं डालो तब तक उपज नहीं मिलती है डीएपी के लिए पिछले दो महीने से परेशान हो रहे हैं बड़ी मुश्किल से तो खाद यहां पर आता है और जब लेने के लिए आते हैं तो 8-8, 10 घंटे लाइन में लगना पड़ता है फिर भी उर्वरक की व्यवस्था नहीं हो पाती.
देवरी से आई लीला ने बताया कि में अपना घर का कामकाज छोड़ कर आई है, घर पर बिटिया और बहू है. लेकिन में सुबह से ही खाद की लाइन में लगी हूं, यूरिया की जरूरत है मिल नहीं रहा है टोकन भी नहीं दिया है कहते हैं कि बिना टोकन की महिलाओं को खाद दे रहे लेकिन सुबह से 5 घंटे हो गए हैं अभी तक खाद नहीं दिया है.
About the Author
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें