गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) भोपाल में हुई हिंसा की गंभीर घटना अब सिर्फ कैंपस तक सीमित नहीं रही। कॉलेज प्रबंधन ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी है, जिसके बाद यह मामला अब राज्य स्तर पर पहुंच गया है।
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चिकित्सा शिक्षा विभाग तक पहुंचा पूरा मामला पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सौंप दी गई है। जीएमसी प्रबंधन द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, 4 दिसंबर की रात कैंपस स्थित सुधामृत कैंटीन में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। यह विवाद मैगी बनवाने को लेकर शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह गंभीर मारपीट में बदल गया। जिसके बाद घायल युगीन चौधरी को तत्काल हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अब भी उनकी निगरानी की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार विवाद की मुख्य वजह डे स्कॉलर और हॉस्टलर्स के बीच का टशन था।
रिपोर्ट में दर्ज आरोपियों के नाम कॉलेज प्रबंधन द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में उन छात्रों के नाम भी शामिल हैं, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस घटना में शामिल बताए गए हैं। इनमें एमबीबीएस 2023 बैच और 2024 बैच के कई छात्रों के नाम दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि यह कृत्य “गंभीर अनुशासनहीनता” की श्रेणी में आता है और इसे केवल सामान्य छात्र विवाद नहीं माना जा सकता।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह भी बताया गया है कि कॉलेज स्तर पर तत्काल आपात बैठक बुलाकर प्राथमिक जांच शुरू कर दी गई थी और प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए छात्रों को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है।
राज्य स्तर से निगरानी की तैयारी रिपोर्ट मिलने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग भी हरकत में आ गया है। विभाग अब इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच पर विचार कर रहा है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि एक राज्य स्तरीय समिति गठित की जा सकती है, जो यह जांच करेगी कि कॉलेज में एंटी-रैगिंग गाइडलाइन्स का कितना पालन हो रहा है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यदि ऐसे मामले लगातार सामने आते हैं, तो यह पूरे मेडिकल एजुकेशन सिस्टम की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
घटना की टाइमलाइन रिपोर्ट में दर्ज इस रिपोर्ट का एक अहम हिस्सा यह भी है कि कुछ छात्रों के नशे की हालत में होने की आशंका जताई गई है। हालांकि इस बिंदु पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस घटना से जूनियर छात्रों में डर का माहौल है, जबकि सीनियर छात्रों के एक वर्ग में नाराजगी भी देखी जा रही है। कई छात्र अब यह मांग कर रहे हैं।