बीआरटीएस तोड़ने के लिए लगातार हो रही देरी और इसकी निगरानी के लिए बनाई गई कमेटी ने बुधवार को निरीक्षण किया। कमेटी में हाईकोर्ट के छह वकील शामिल थे। कमेटी ने बताया कि हम नगर निगम के काम से संतुष्ट नहीं हैं। 15 दिसंबर को इस मामले में हाईकोर्ट में रिपोर्ट
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कमेटी के प्रमुख एडवोकेट गिरीश पटवर्धन ने कहा – राजीव गांधी चौराहा से पलासिया तक का निरीक्षण किया। बीआरटीएस हटाने का जो काम है वो संतोषजनक नहीं है। रेलिंग भी रास्ते में पड़ी थी। धूल का गुबार उठ रहा है।
बस स्टेशनों को तोड़ने के लिए काफी लंबा समय लग रहा है। शिवाजी वाटिका के सामने वाले स्टेशन को दो माह से ज्यादा समय हो गए पर टूटा ही नहीं। 15 दिसंबर तक हमें हाईकोर्ट में यहां की स्थिति की रिपोर्ट पेश करना है।
नगर निगम की ओर से आए प्रतीक अहीरवाल, श्रीकांत काटे ने कहा कि हमें तो एक ही ओर की रेलिंग हटाने के निर्देश हैं। एडवोकेट पटवर्धन ने कहा कि हमें यह पता है कि ऐसा कोई आदेश नहीं है। दोनों तरफ की रेलिंग हटाई जाना है।
हाईकोर्ट ने बनाई थी कमेटी
1 दिसंबर को सुनवाई के दौरान बीआरटीएस तोड़ने का पूरा काम तीन माह में पूरा होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन एक लेन की रेलिंग का काम 15 दिन में पूरा करने का आश्वासन दिया गया। इस पर कोर्ट ने एक मॉनिटरिंग कमेटी बना दी।
इस कमेटी में एडवोकेट गिरीश पटवर्धन, एनएस भाटी, कौस्तुभ पाठक, अजयराज गुप्ता, प्रद्युम्न किबे और जय शर्मा को लिया गया है। यह कमेटी बीआरटीएस रिमूवल कार्रवाई की रिपोर्ट 16 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर कोर्ट के समक्ष पेश करेगी।
इसी तरह जस्टिस विजयकुमार शुक्ला एवं जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की डिवीजन बेंच ने यह भी निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई पर कलेक्टर एवं निगमायुक्त के साथ डीसीपी ट्रैफिक भी व्यक्तिगत रूप से हाजिर रहें।
शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट में दायर अलग-अलग तीन जनहित याचिकाओं पर कल सुनवाई हुई थी। इसमें कोर्ट के निर्देश पर कलेक्टर एवं निगमायुक्त व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए थे। इस दौरान शहर के ट्रैफिक सुधार को लेकर हाईकोर्ट ने कई बिंदुओं पर नाराजगी जताई थी।