कांटों से घिरा पौधा! गंभीर बीमारियों में रामबाण इलाज, 1-2 नहीं अनगिनत फायदे

कांटों से घिरा पौधा! गंभीर बीमारियों में रामबाण इलाज, 1-2 नहीं अनगिनत फायदे


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Sidhi News: डॉ सौरभ परौहा ने लोकल 18 को बताया कि मकोय या भटकटैया का पौधा खांसी के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. पुरानी से पुरानी खांसी का उपचार भी इसके काढ़े से संभव है. काढ़ा बनाने के लिए पौधे की जड़, तना, फूल और फल को अच्छी तरह धोकर धीमी आंच पर दो से चार घंटे तक पकाया जाता है.

सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इन्हीं में से एक है मकोय, जिसे बघेली भाषा में भटकटैया के नाम से भी जाना जाता है. यह पौधा पथरीली और बंजर जमीन पर आसानी से उग जाता है और आयुर्वेद में कंटकारी नाम से प्रसिद्ध है. चारों ओर कांटों से घिरा यह पौधा वर्षों से आयुर्वेदिक उपचार में उपयोग होता आ रहा है और कई बीमारियों के उपचार में बेहद उपयोगी माना जाता है. मध्य प्रदेश के सीधी के आयुष चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ सौरभ परौहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि भटकटैया शुष्क और गर्म जलवायु में खूब पनपता है. विंध्य क्षेत्र का मौसम इसके लिए बेहद अनुकूल है.

डॉ सौरभ ने बताया कि यह पौधा खांसी के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. पुरानी से पुरानी खांसी, जो लंबे समय तक ठीक नहीं होती, उसका उपचार भी इसके काढ़े से संभव है. काढ़ा बनाने के लिए पौधे की जड़, तना, फल और फूल को अच्छी तरह धोकर धीमी आंच पर दो से चार घंटे तक पकाया जाता है. जब पानी एक तिहाई रह जाए, तो इसे छानकर गाढ़े रूप में उपयोग किया जाता है.

दांत दर्द में भी देता है आराम
डॉ सौरभ परौहा के अनुसार, भटकटैया का काढ़ा खांसी, अस्थमा, बुखार और शरीर दर्द में राहत देने में कारगर है. इसके सेवन से शरीर की गर्मी संतुलित होती है और बलगम की समस्या भी खत्म होती है. यह पौधा पेट दर्द, गैस और अपच जैसी समस्याओं में भी राहत देता है. दांत दर्द होने पर इसके बीजों का धुआं या काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से तुरंत आराम मिलता है. मुंह के छाले भी इसके सेवन से ठीक हो जाते हैं. इसके अलावा मूत्राशय की पथरी के दर्द में भी यह काफी उपयोगी माना जाता है.

खून साफ करता है भटकटैया पौधा
उन्होंने आगे बताया कि भटकटैया के उपयोग से रक्त शुद्ध होता है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याओं में सुधार आता है. मुंहासे और एक्जिमा जैसी परेशानियों में इसके फायदे देखे गए हैं. पौधे की जड़ भूख बढ़ाने में भी सहायक होती है, जिससे कमजोर और दुबले‌ पतले लोगों को फायदा मिलता है. परंपरागत इलाज में इस पौधे को वर्षों से महत्वपूर्ण औषधि के रूप में उपयोग किया जाता रहा है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



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