अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अब ट्रामा और इमरजेंसी विभाग अलग-अलग हो गया है। इसके तहत अब 11 बेड ऑब्जेशन के लिए इमरजेंसी में तो 11 बेड ट्रामा में रहेंगे। इसके अलावा 10 बेड पीडियाट्रिक इमरजेंसी के लिए रहेंगे। इस तरह 32 बेड के अलावा 42 अलग
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इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीज को आसानी से सेग्रीकेट किया जा सकेगा। वहीं कहां शिफ्ट करना है या किस वार्ड में भेजना है स्टेबलाइज करने के बाद यह निर्णय जल्द लिया जा सकेगा। इससे अधिक से अधिक मरीजों को स्टेबलाइजेशन का समय मिल सकेगा। बेड की उपलब्धता हमेशा बनी रहेगी।
सर्जरी या इलाज का प्रोटोकॉल जल्दी तय होगा। इमरजेंसी विभाग की कमान मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. रजनीश जोशी संभालेंगे जबकि ट्रामा विभाग न्यूरो सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. अमित अग्रवाल लीड करेंगे। एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर दोनों विभाग अलग-अलग संचालित होने लगेंगे।
डॉ. रश्मि केस: फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनी, डॉक्टरों का विरोध
डॉ. रश्मि के आत्महत्या प्रयास के पीछे टॉक्सिक माहौल भी जिम्मेदार माना जा रहा है। यही वजह रही कि रविवार को एम्स प्रबंधन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में एक फैक्ट फाइनडिंग कमेटी बनाई गई है।
कमेटी में डीन अकेडमिक्स डॉ. रजनीश जोशी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. विकास गुप्ता, जनरल सर्जरी विभाग की प्रोफेसर डॉ. भारतीय पांडया, पीडियाट्रिक विभाग के प्रोफेसर डॉ. महेश माहेश्वरी व वरिष्ठ प्राशासनिक अधिकारी मयंक कपूर शामिल हैं।
इन्हें इस पूरे मामले में वास्तविक घटनाक्रम सहित अन्य विषयों पर जानकारी देनी है। खास बात यह है कि इधर, डॉक्टर्स के अपने इंटरनल ग्रुप में इस कमेटी का विरोध शुरू हो गया है। इसमें बताया जा रहा है कि कमेटी में बाहरी व्यक्ति को शामिल करना जरूरी है तभी निष्पक्ष जांच हो पाएगी।
गंभीर मामलों में तेजी से होंगे फैसले, रेफरल सिस्टम भी सुधरेगा
ट्रॉमा और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग अलग किए जाने से मरीजों को तेज और विशेषज्ञ इलाज मिल सकेगा। ट्रॉमा विभाग को न्यूरो जैसी सुपर स्पेशियलिटी से जोड़ने पर गंभीर सड़क हादसे, सिर और रीढ़ की चोटों के मामलों में फैसले तेजी से होंगे।
वहीं इमरजेंसी मेडिसिन को मेडिसिन विभाग के अधीन करने से हार्ट अटैक, सांस की दिक्कत, स्ट्रोक, संक्रमण और अन्य मेडिकल इमरजेंसी मरीजों का इलाज ज्यादा व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा। इसके अलावा कार्यभार बंटने से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर दबाव कम होगा, जिससे इलाज की गुणवत्ता बेहतर होगी। जिम्मेदारियां स्पष्ट होने से रेफरल सिस्टम सुधरेगा और मरीजों को अनावश्यक इंतजार से राहत मिलेगी।
इन एम्स में पहले से अलग: एम्स दिल्ली, ऋषिकेश जोधपुर, भुवनेश्वर, रायपुर में ट्रॉमा सेवाएं अलग यूनिट में हैं। इसी तरह से इमरजेंसी मेडिसिन भी अलग विभाग में कार्यरत है।