रीवा के अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह अब एक बयान को लेकर विवादों में है। समारोह में छात्रों को उपाधि प्रदान करने के लिए विश्व हिंदू परिषद से जुड़े महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम के बाद मीडिय
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चर्चा के दौरान महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अहिंसा की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे गांधी जी की विचारधारा को नहीं मानते। उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि
अगर एक गाल पर थप्पड़ पड़े तो दूसरा गाल आगे कर दिया जाए, तो तीसरा गाल कहां से लाया जाएगा।

इस बयान को गांधी जी की अहिंसक सोच का अपमान और हिंसा को बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा है।
शैक्षणिक मंच पर बयान को लेकर नाराजगी इस बयान के सामने आने के बाद शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने नाराजगी जताई है। आलोचकों का कहना है कि महात्मा गांधी किसी एक विचारधारा या पार्टी के नहीं, बल्कि पूरे देश के राष्ट्रपिता हैं। विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान में इस तरह की टिप्पणी छात्रों को गलत संदेश देने वाली है।
उनका यह भी कहना है कि स्कूल और विश्वविद्यालय ऐसे स्थान होते हैं, जहां विभिन्न जाति, धर्म और विचारों के छात्र एक साथ शिक्षा ग्रहण करते हैं। ऐसे में वैचारिक उन्माद या विवादित बयान शैक्षणिक माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।
‘भारत माता की जय’ बयान पर भी सवाल विवाद यहीं नहीं थमा। महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद द्वारा यह कहना कि भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ बोलना चाहिए, इस पर भी आपत्ति जताई जा रही है। विरोध करने वालों का कहना है कि देश से प्रेम नागरिकों की भावना है, लेकिन शैक्षणिक मंचों पर इस तरह की अनिवार्यता सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से संज्ञान लेने और भविष्य में ऐसे विवादित वक्तव्यों से शैक्षणिक आयोजनों को दूर रखने की मांग की जा रही है। साथ ही यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या शिक्षा के मंचों का राजनीतिक या वैचारिक उपयोग किया जाना चाहिए।
फिलहाल पूरा मामला चर्चा में है और आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन व संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।