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Bahori Lal Success Story: छतरपुर जिले के रहने वाले बहोरी लाल जो पिछले 20 सालों से खेती करते थे लेकिन खेती में मुनाफा कम होने से इन्होंने बिजनेस करने का सोचा. जिसके बाद इन्होंने कपड़ा की दुकान खोली. साथ ही इन्होंने दिमाग लगाया कि क्यों न कपड़ा दुकान के साथ घर-घर जाकर कपड़े को बेचा जाए. इसी आइडिया से बहोरी लाल आज डबल मुनाफा कमा रहे हैं. आइए जानते हैं इस शख्स की सफलता की कहानी.
Success Story. छतरपुर जिले के गौरिहार जनपद के अंतर्गत आने वाले अलीपुर गांव के रहने वाले बहोरी लाल अनुरागी बताते हैं कि 1 साल पहले गौरिहार में रेडीमेड कपड़ा की दुकान खोली थी. मार्केट में दुकान पहले से ही थी तो प्रतिस्पर्धा ज्यादा दिख रही थी. इसके बाद मेरे दिमाग में आइडिया आया कि क्यों न दुकान के साथ गांव-गांव जाकर कपड़ों को बेचा जाए. मेरा यह आइडिया चल गया और अब मुझे इससे डबल मुनाफा हो जाता है.
सस्ते और क्वालिटीदार कपड़ों से बनाई पहचान
बहोरी लाल बताते हैं कि मैं अपने क्षेत्र में ही रहकर यह बिजनेस करता हूं. क्षेत्र में मेरी पहचान सालों से बनी हुई है तो मुझे इस धंधे को करने में ज्यादा दिक्कत नहीं आई है. लोग मुझ पर विश्वास करते हैं और मेरे कपड़ों की क्वालिटी पर भी पूरा भरोसा करते हैं. इसलिए मेरे कपड़े लोग खरीदना पसंद करते हैं.
खेती छोड़ शुरू किया कपड़ा बिजनेस
बहोरी लाल बताते हैं कि मैं पिछले 20 सालों से खेती करता आया हूं लेकिन पिछले 5 सालों से खेती में मुनाफा नहीं हो रहा था. हमारे क्षेत्र में आवारा जानवरों की समस्या है और पानी की भी समस्या है जिसकी वजह से हमें हर साल खेती में घाटा लग रहा था. इसलिए मैंने बाजार में एक रेडीमेड कपड़ा दुकान खोलने का सोचा. हालांकि, दुकान मैंने अपने बेटे के लिए रखी थी. लेकिन बाजार में प्रतिस्पर्धा ज्यादा थी जिससे ज्यादा मुनाफा नहीं हो पा रहा था. इसके बाद मैंने बेटे से कहा कि तुम दुकान पर रहकर कपड़ों को बेचो और मैं गांव-गांव जाकर अपनी पुरानी पहचान का फायदा उठाते हुए कपड़ों को बेचता हूं.
ये कपड़े बेचते हैं
बहोरी लाल बताते हैं कि मेरा यह धंधा 12 महीने चलता है. अभी ठंड का सीजन है तो इस सीजन वाले कपड़े ही ला रहे हैं. मेरे पास बच्चों से लेकर युवा, बुजुर्ग और महिलाओं तक के ठंड के कपड़े रहते हैं. मेरे पास मोजे से लेकर हैंड ग्लव्स, इनर, स्वेटर, जैकेट , सॉल, ब्लैंकेट , टोपा, मफलर जैसे कपड़े रखता हूं.
7 घंटे में इतनी कमाई
बहोरी लाल बताते हैं कि मैं घर से सुबह 10 बजे निकल जाता हूं और शाम को 5 बजे वापस लौट आता हूं. मैं दिन भर में इतने कपड़े बेच लेता हूं जिससे मुझे 300 रुपए से लेकर 500 रुपे तक का शुद्ध मुनाफा हो जाता है. मेरा खर्च सिर्फ यही है कि इस लूना बाइक में मुझे ₹100 का तेल लगता है और मेरा कुछ खास खर्च नहीं होता है. लूना बाईक में 5 बैग रखकर बेचता हूं, हर बैग में नाम लिखकर रहता हूं ताकि खोलने और बांधने में दिक्कत न हो. मैं अपने घर के आसपास 40 किलोमीटर तक में ही यह धंधा करता हूं.
ऐसे होता है डबल मुनाफा
बहोरी लाल बताते हैं कि कपड़ा एक ऐसा धंधा होता है जो 12 महीने चलता है. भले ही किसी दिन कम लोग खरीदते हैं किसी दिन ज्यादा लोग खरीदते हैं लेकिन अगर आप घूमते-फिरते रहते हैं तो आपको आसानी से हर दिन 500 रुपए का शुद्ध मुनाफा हो जाता है. मैं यहां गांव-गांव घूम कर पैसे कमाता हूं वही बेटा दुकान में बैठकर पैसे कमाता है इससे हमारा मुनाफा डबल हो जाता है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें