टीकमगढ़10 घंटे पहले
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- इस बार दशहरा और नवमी एक ही दिन, सुबह आराधना और शाम को रावण का होगा दहन
देवी आराधना का पर्व इस बार विशेष संयोगों के साथ आएगा। बुधादित्य और सर्वार्थ सिद्धि जैसे खास योग इस बार शक्ति साधना को और महत्वपूर्ण बनाएंगे। देवी भक्तों को माता की आराधना और सिद्धि के लिए अवसर मिलेंगे। नवरात्रि को लेकर प्रशासन ने बेशक पाबंद जारी किए हों, लेकिन मंदिरों के अंदर घरों में दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पं. बृजमोहन गंगेले के मुताबिक, शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू होकर 25 अक्टूबर को पूर्ण होंगे। इसमें बुधादित्य योग, तीन रवि योग, एक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेंगे। इससे नवरात्रि में देवी आराधना करने वालों को सिद्धियां प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। घट स्थापना शनिवार को तुला राशि का चंद्रमा, चित्रा नक्षत्र, विष्कुंभ योग, करण किंस्तुन रहेगा। एक साल में 4 नवरात्र मानी जाती हैं। उनमें से दो गुप्त व दो उजागर नवरात्रि होती हैं। अश्विन मास की नवरात्रि सबसे खास नवरात्र मानी जाती है। इस नवरात्र में पूरे देश में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती हैं। नाै दिन की साधना व देवी उपासना के बाद दशमीं को दशहरा मनाया जाता है।
इस बार नवमीं व दशहरा एक ही दिन मनेंगे: नवरात्रि के नौ दिन में देवी के नौ रूपों की स्तुति की जाती है। नवमीं तिथी की समाप्ति रविवार सुबह 7.42 बजे हो जाएगी। इसके बाद दशमीं लग जाएगी। इसलिए नवमीं, विजयादशमीं व अपराजिता पूजन इसी दिन किया जाएगा। कहने का आशय है कि नवमीं व दशहरा का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा।