टेस्ट क्रिकेट का अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड…286 पारियों में कभी Golden Duck नहीं हुआ ये दिग्गज क्रिकेटर, करियर में ठोके 36 शतक

टेस्ट क्रिकेट का अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड…286 पारियों में कभी Golden Duck नहीं हुआ ये दिग्गज क्रिकेटर, करियर में ठोके 36 शतक


Unique world record in Test cricket: टेस्ट क्रिकेट का इतिहास करीब 150 साल पुराना है. इस फॉर्मेट में कई महान बल्लेबाज आए और गए, लेकिन कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं, जो किसी खिलाड़ी को भीड़ से बिल्कुल अलग खड़ा कर देते हैं. भारतीय क्रिकेट में ऐसा ही एक नाम है राहुल द्रविड़, जिन्हें दुनिया भर में ‘द वॉल’ के नाम से जाना जाता है. द्रविड़ ने अपने लंबे और शानदार करियर में कई ऐतिहासिक कारनामे किए हैं, लेकिन उनका सबसे अनोखा रिकॉर्ड ऐसा है, जिसे जानकर हर कोई हैरान हो जाता है. राहुल द्रविड़ दुनिया के वही क्रिकेटर हैं, जो टेस्ट क्रिकेट में कभी भी गोल्डन डक पर आउट नहीं हुए.

राहुल द्रविड़ ने 1996 से लेकर 2012 तक 164 टेस्ट मैच खेले और 286 पारियों में बल्लेबाजी की, लेकिन कभी भी वह टेस्ट में पहली बॉल पर आउट नहीं हुए. इस दिग्गज ने टेस्ट में नंबर 3 पर बैटिंग की, जहां नई गेंद से तेज गेंदबाज लगातार चुनौती देते हैं, वहां इतनी लंबी करियर यात्रा बिना गोल्डन डक के पूरी करना अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं है. खास बात यह रही कि द्रविड़ ने इसी दौरान 13,288 रन बनाए और टेस्ट इतिहास में गोल्डन डक से बचे रहते हुए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने. इस वर्ल्ड रिकॉर्ड का टूटना लगभग असंभव सा लगता है.

आखिर क्यों खास है यह रिकॉर्ड?

अब सवाल यह है कि आखिर यह रिकॉर्ड खास क्यों है, तो जान लीजिए कि गोल्डन डक पर आउट होना क्रिकेट का सबसे शर्मनाक माना जाता है. यह किसी भी दिग्गज के साथ हो सकता है. सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा, रिकी पोंटिंग और जैक्स कैलिस जैसे महान खिलाड़ी भी अपने करियर में गोल्डन डक का सामना कर चुके हैं. ऐसे में राहुल द्रविड़ का पूरे टेस्ट करियर में इस स्थिति से बचा रहना उनकी गजब की तकनीक, एकाग्रता और धैर्य को दर्शाता है. यह रिकॉर्ड साबित करता है कि द्रविड़ हर पारी की शुरुआत कितनी सतर्कता से करते थे. इसलिए यह एक खास रिकॉर्ड बन जाता है.

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दूसरे दिग्गजों से कैसे अलग थे राहुल द्रविड़?

हर खिलाड़ी की अपनी खासियत होती है. राहुल द्रविड़ ने उस दौर में सचिन तेंदुलकर, रिकी पोंटिंग और ब्रायन लारा जैसे दिग्गजों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई. राहुल द्रविड़ को ‘द वॉल’ कहा जाता था, क्योंकि वह क्रीज पर दीवार की तरह टिक जाते थे. नई गेंद को संभालना हो या फिर गेंद की लाइन-लेंथ को जल्दी पढ़ना, इसमें द्रविड़ को महारत हासिल थी. यही वजह रही कि वह कभी जल्दबाजी में आउट नहीं हुए और गोल्डन डक जैसे रिकॉर्ड से हमेशा दूर रहे.

राहुल द्रविड़ के टेस्ट करियर पर एक नजर

राहुल द्रविड़ का टेस्ट करियर अपने आप में मिसाल है. उन्होंने 164 टेस्ट में 52.31 की औसत से 13,288 रन बनाए, जिसमें 36 शतक और 63 अर्धशतक शामिल हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 270 रन रहा. खास बात यह रही कि 32 बार वह टेस्ट में नाबाद लौटे. द्रविड़ न सिर्फ भारत के लिए रन मशीन थे, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभालने वाले सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज भी थे.

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