कार्यक्रम में लोगों ने भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प लिया।
झाबुआ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में अमरगढ़ मंडल में एक विशाल ‘हिंदू सम्मेलन’ हुआ इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जनों और मातृशक्ति ने भाग लिया, जहां सामाजिक एकता और राष्ट्रवाद का संदेश दिया गया।
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समाज से धर्म के मार्ग पर चलने की अपील
सम्मेलन का शुभारंभ आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। संत गंगाराम गिरी ने अपने आशीर्वचन में समाज को धर्म के मार्ग पर चलने और एकता बनाए रखने का मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि एक संस्कारित समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव होता है।
मुख्य वक्ता नीनू बसेर ने ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने उपस्थित मातृशक्ति से बच्चों को सुसंस्कारित बनाने की अपील की, यह कहते हुए कि परिवार ही संस्कारों की प्रथम पाठशाला है। उन्होंने सामाजिक समरसता पर बल देते हुए कहा कि समाज से भेदभाव मिटाना और परस्पर प्रेम भाव रखना वर्तमान की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सभी से एकजुट होकर भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
सभी से एकजुट होकर भारत को विश्व गुरू बनाने का लिया संकल्प
एक अन्य मुख्य वक्ता, कालू सिंह चरपोटा ने संघ के 100 वर्षों की यात्रा और उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत के गौरवशाली प्राचीन इतिहास का स्मरण कराया और देश के महान क्रांतिकारियों की जीवन शैली से युवाओं को अवगत कराया।
चरपोटा ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्वजों और क्रांतिकारियों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। उन्होंने सभी से एकजुट होकर भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
‘जय श्री राम’ के लगे नारे
सम्मेलन स्थल ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज उठा। इस आयोजन ने वैचारिक चेतना जागृत करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर संगठन को नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।