जनवरी की शुरुआत में रबी फसलों पर टूट पड़ता है ये कीड़ा, तुरंत अपनाएं देसी उपाय, तभी बचेगा सरसों, गेहूं

जनवरी की शुरुआत में रबी फसलों पर टूट पड़ता है ये कीड़ा, तुरंत अपनाएं देसी उपाय, तभी बचेगा सरसों, गेहूं


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Winter Agri Tips: नए साल की शुरुआत के साथ ही रबी फसलों पर माहू का खतरा बढ़ने लगता है. सरसों, गेहूं और चने की फसलों में यह रस चूसने वाला कीट तेजी से फैलता है और समय पर नियंत्रण न हो तो उपज को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार शुरुआती प्रकोप में देसी उपाय ही कारगर साबित होता है. जानें…

Agri Tips: नए साल के शुरुआती महीने किसानों के लिए बेहद अहम होते हैं, क्योंकि इसी समय रबी फसलों की बढ़वार अपने महत्वपूर्ण चरण में होती है. जनवरी के मौसम में हल्की ठंड, नमी और कोहरा कई बार फसलों के लिए अनुकूल होता है, लेकिन यही परिस्थितियां कुछ हानिकारक कीटों को भी तेजी से पनपने का मौका देती हैं. इन्हीं में से एक प्रमुख कीट है माहू (एफिड) जो सरसों, गेहूं और चना जैसी रबी की मुख्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. अगर समय रहते इसकी पहचान और नियंत्रण न किया जाए, तो किसानों की मेहनत और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है.

माहू का प्रकोप, रबी फसलों के लिए बड़ा खतरा
लोकल 18 से बातचीत में किसान अंशुमान सिंह ने बताया, माहू रस चूसने वाला कीट है, जो पौधों की पत्तियों, फूलों और नई टहनियों से रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है. इसके कारण पौधों की बढ़वार रुक जाती है, पत्तियां मुड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे उपज में भारी गिरावट देखने को मिलती है. खास बात ये कि माहू बहुत तेजी से फैलता है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही नियंत्रण के उपाय अपनाना बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि सरसों, गेहूं और चने की फसलों में माहू का प्रकोप खासतौर पर जनवरी-फरवरी के दौरान देखने को मिलता है. इस समय खेतों की नियमित निगरानी करना किसानों के लिए सबसे अहम कदम है ताकि समय रहते समस्या को रोका जा सके.

देसी उपाय पहले, रासायनिक बाद में
माहू के शुरुआती प्रकोप में देसी और जैविक उपाय सबसे बेहतर होते हैं. उन्होंने नीम तेल के स्प्रे को सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका बताया. नीम तेल की गंध और उसके तत्व माहू जैसे कीटों को दूर भगाते हैं और फसल को नुकसान से बचाते हैं. नीम तेल स्प्रे तैयार करने के लिए 50 मिलीलीटर नीम तेल को प्रति लीटर पानी में अच्छी तरह घोलें और इस घोल का छिड़काव प्रभावित हिस्सों पर करें. ऑयल किसी भी खाद-बीज की दुकान पर आसानी से मिल जाता है. ध्यान रहे कि जिन पत्तियों या टहनियों पर माहू का अधिक प्रकोप हो उन्हें पहले छांटकर अलग कर दें, उसके बाद नीम तेल छिड़कें.

छिड़काव का सही समय और तरीका
अंशुमान ने किसानों को सलाह दी कि छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के समय करें जब धूप हल्की हो और हवा कम चले. इससे दवा का असर बेहतर होता है और मधुमक्खियों व लाभकारी कीटों को भी कम नुकसान पहुंचता है. शुरुआती प्रकोप में एक छिड़काव पर्याप्त हो सकता है लेकिन यदि माहू ज्यादा फैल गया हो तो 7 से 10 दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव किया जा सकता है.

रासायनिक उपाय भी प्रभावी
अगर माहू का प्रकोप बहुत अधिक हो जाए और देसी उपायों से नियंत्रण न हो तो रासायनिक दवाओं का सहारा लिया जा सकता है. इसके लिए इमिडाक्लोप्रिड या थायोमेथोक्साम का छिड़काव प्रभावी माना जाता है. हालांकि, कोशिश करें कि इसका उपयोग अंतिम विकल्प के रूप में ही किया जाए. कुल मिलाकर किसानों के लिए यही जरूरी है कि वे नए साल की शुरुआत में अपनी रबी फसलों पर खास नजर रखें. शुरुआती लक्षण दिखते ही सही उपाय अपनाकर माहू के प्रकोप को रोका जा सकता है और अच्छी पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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जनवरी की शुरुआत में रबी फसलों पर टूट पड़ता है ये कीड़ा, तुरंत अपनाएं देसी उपाय



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