भोपाल का भूजल ‘जहर’ जैसा, 100 गुना ज्यादा आयरन: इंदौर के भागीरथपुरा जैसे बैक्टीरिया भी मिले; बदबू इतनी कि सांस लेना भी दूभर – Bhopal News

भोपाल का भूजल ‘जहर’ जैसा, 100 गुना ज्यादा आयरन:  इंदौर के भागीरथपुरा जैसे बैक्टीरिया भी मिले; बदबू इतनी कि सांस लेना भी दूभर – Bhopal News


भोपाल के आदमपुर छावनी के आसपास के गांवों में हैंडपंप से लाल पानी आ रहा है।

इंदौर के भागीरथपुरा में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो कोलेरी और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया वाले पानी की वजह से अब तक 20 जानें जा चुकी हैं। यही ई-कोलाई बैक्टीरिया भोपाल के पानी में भी मिला है। राजधानी के कई इलाकों में पेयजल इतना दूषित है कि

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भोपाल के आदमपुर छावनी, हरिपुरा, पड़रिया, शांति नगर, अर्जुन नगर, कोलुआ, खानूगांव और वाजपेयी नगर के ग्राउंड वाटर में कैंसर, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों की वजह बनने वाला ‘खतरनाक’ बैक्टीरिया मिला है। यहां की आबादी 5 हजार से ज्यादा है। पीने के पानी में बैक्टीरिया की पुष्टि खुद भोपाल नगर निगम की रिपोर्ट से हुई है।

इस पानी में आयरन की मात्रा 10 या 20 गुना नहीं बल्कि पूरे 100 गुना ज्यादा है। यदि भूल से भी ये पानी कोई पी ले तो हेमोक्रोमैटोसिस जैसी बीमारी होने के पूरे चांस हैं। यहां के ग्राउंड वाटर में टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स), कैल्शियम, टोटल हार्डनेस, सल्फेट, कोलीफॉर्म भी ज्यादा मात्रा में हैं।

भोपाल के पडरिया में हैंडपंप से ऐसा पानी आ रहा है।

पानी के टैंकरों पर निर्भर लोग दैनिक भास्कर की टीम वाटर एक्सपर्ट राशिद नूर के साथ भोपाल के सबसे प्रदूषित इलाके में पहुंची, जो आदमपुर खंती के आसपास है। टीम ने जब ग्राउंड वाटर देखा तो कहीं भी पानी पीने क्या, बर्तन या हाथ-पैर धोने के लिए भी उपयोगी नहीं दिखा। इस वजह से लोग बाहर से आने वाले टैंकरों के पानी पर डिपेंड हैं।

दूसरी ओर, यहां पर फल और सब्जियां भी उगाई जा रही हैं। जो हर रोज बड़ी मात्रा में भोपाल की मंडियों में पहुंच रही हैं। इनके उपयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

आदमपुर समेत अन्य जगहों पर लोग भूजल का घरेलू उपयोग करने से बच रहे हैं।

आदमपुर समेत अन्य जगहों पर लोग भूजल का घरेलू उपयोग करने से बच रहे हैं।

पडरिया में एक भी हैंडपंप से स्वच्छ पानी नहीं पडरिया में करीब 8 हैंडपंप हैं लेकिन एक भी ऐसा नहीं है, जो साफ पानी दे रहा है। पानी में लाल रंग के बैक्टीरिया नंगी आंखों से ही नजर आ जाते हैं। किराना दुकान चलाने वाले इरफान मियां ने बाल्टी में भरे पानी को कांच के ग्लास में दिखाया। पानी न सिर्फ लाल था, बल्कि बदबूदार भी था।

इरफान ने बताया कि करीब 10 साल से हैंडपंप यही जहर उगल रहे हैं। इसका उपयोग हम पीने के लिए नहीं करते हैं, बल्कि दुकान के सामने जमीन पर छिड़काव कर देते हैं।

इरफान मियां की दुकान के ठीक पीछे ही एक और हैंडपंप नजर आया। पानी भर रही एक महिला ने कहा- अधिकतर हैंडपंप से लाल पानी ही आता है। हम इसे पीते नहीं हैं, बल्कि कपड़े धो लेते हैं।

फसलों की सिंचाई करना मजबूरी शांति नगर के महेश उईके ने कहा- निगम टैंकर भेजता है। हम इसी का पानी पीते हैं। भूजल खराब है, इससे मजबूरी में फसलों की सिंचाई करते हैं। घोड़ापछाड़ नहर का पानी भी खराब स्थिति में ही है।

दुकानदार इरफान मियां ने ग्लास में हैंडपंप का पानी भरकर दिखाया।

दुकानदार इरफान मियां ने ग्लास में हैंडपंप का पानी भरकर दिखाया।

7 गांवों का भूजल खराब कर रहा कचरा पर्यावरणविद् डॉ. सुभा‌ष पांडे ने कहा- जनवरी 2018 से आदमपुर छावनी में भोपाल का कचरा डंप किया जा रहा है। खंती के संबंध में रिसर्च करने के साथ मैंने एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं भी लगाईं। डंपिंग साइट पर फिलहाल 14 लाख टन कचरा इकट्‌ठा है। इससे निकलने वाला रसायन जिसे लिचर्ड भी कहा जाता है, 7 गांवों का भूजल खराब कर रहा है।

पानी में मिले कैंसर देने वाले आयरन-क्रोमियम पर्यावरणविद् पांडे ने बताया कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB), एमपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (MPCB) की रिपोर्ट और मेरी रिसर्च में भी यह सच सामने आ चुका है। इंदौर में तो ई-कोलाई बैक्टीरिया ही मिला है, लेकिन यहां इससे भी ज्यादा गंभीर समस्या है। आदमपुर खंती और आसपास के गांवों में भूजल के अंदर आयरन, क्रोमियम भी मिले हैं, जिनसे कैंसर जैसी बीमारी होती है।

CPCB ने अगस्त 2025 में अपनी 80 पेज की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी। इसमें पानी में इतना आयरन बताया गया था कि यह न सिर्फ पीने बल्कि सब्जी और फसलों के पैदावार के लिए भी ठीक नहीं है। कुल 25 पैरामीटर में से 9 ऐसे थे, जो ज्यादा खतरनाक स्थिति में मिले।

डॉ. पांडे ने बताया कि निगम यहां पर टैंकरों से पानी की सप्लाई जरूर कर रहा है, लेकिन उसकी भी जांच नहीं की गई है।

यह रिपोर्ट अगस्त 2025 में सीपीसीबी ने कोर्ट में पेश की थी।

यह रिपोर्ट अगस्त 2025 में सीपीसीबी ने कोर्ट में पेश की थी।

हर रोज आदमपुर खंती पहुंचता है 800 टन कचरा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल से हर रोज 850 टन कचरा निकलता है। इसमें से 800 टन कचरा प्रोसेसिंग के लिए खंती पहुंचता है। इसमें 290 टन मिट्‌टी होती है, बाकी बचा 510 टन मिक्स कचरा होता है।

निगम के पास जो यूनिट है, वह 420 टन क्षमता की ही है। इस वजह से कचरे का ढेर बनता जा रहा है।

आदमपुर छावनी में चारों ओर कचरे का पहाड़ बनता जा रहा है।

आदमपुर छावनी में चारों ओर कचरे का पहाड़ बनता जा रहा है।

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