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Shivpuri Best Tourist Point: सर्दियों की ठंडी सुबह जब कोहरे की चादर धरती को अपनी आगोश में ले लेती है, तब मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले का नरवर क्षेत्र किसी स्वप्नलोक जैसा दिखाई देने लगता है. जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित यह इलाका प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक विरासत और शांत वातावरण का अद्भुत संगम है. सर्दियों में पहाड़ियों पर उतरता कोहरा, सूरज की हल्की किरणों के साथ मिलकर ऐसा दृश्य रचता है, मानो बादल धरती को छू रहे हों. यही वजह है कि नरवर इस मौसम में पर्यटकों, प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए खास आकर्षण बन जाता है. यहां की पहाड़ियां, हरियाली और ऐतिहासिक नरवर किला मिलकर इस क्षेत्र को “धरती का स्वर्ग” बना देते हैं.
सर्दियों के मौसम में मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले का नरवर क्षेत्र किसी स्वप्नलोक से कम नहीं लगता. शिवपुरी जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित नरवर, प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक विरासत और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है. ठंड के दिनों में यहां का नजारा और भी मनमोहक हो जाता है, जब सुबह-सुबह कोहरे की चादर पहाड़ियों को ढक लेती है और पूरा क्षेत्र बादलों के समुद्र जैसा दिखाई देने लगता है.

सर्दियों की सुबह नरवर की पहाड़ियों पर जब सूर्य की पहली किरणें पड़ती हैं, तो कोहरा धीरे-धीरे पहाड़ियों के नीचे उतरता हुआ दिखाई देता है. यह दृश्य ऐसा प्रतीत होता है मानो आसमान के बादल धरती को छू रहे हों. कैमरे की नजर से यह नजारा बेहद खूबसूरत लगता है और प्रकृति प्रेमियों के साथ-साथ फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह किसी खजाने से कम नहीं होता. ठंडी हवाओं के बीच पहाड़ियों से उठता कोहरा पूरे वातावरण में एक रहस्यमयी और शांत अनुभूति भर देता है.

नरवर के आसपास कई अन्य पहाड़ियां भी मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र को प्राकृतिक रूप से समृद्ध बनाती है. इन पहाड़ियों के बीच बसे गांव, खेत और जंगल सर्दियों में कोहरे की वजह से किसी पेंटिंग जैसे प्रतीत होते है. सुबह के समय जब कोहरा धीरे-धीरे छंटता है, तो हरियाली और पहाड़ियों का संयोजन आंखों को सुकून देता है. यह दृश्य न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी रोजमर्रा की जिंदगी से अलग एक खास अनुभव बन जाता है.
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पर्यटन की दृष्टि से नरवर क्षेत्र काफी समृद्ध है. नरवर किले के अलावा मड़ीखेड़ा बांध और मोहिनी सागर बांध भी यहां से ज्यादा दूर नहीं है. ये बांध प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ जल संसाधनों के लिए भी महत्वपूर्ण है. सर्दियों के मौसम में इन बांधों के आसपास का वातावरण बेहद शांत और मनोरम हो जाता है. जहां लोग प्रकृति के बीच कुछ सुकून के पल बिता सकते है.

शिवपुरी शहर में 30 दिसंबर को रात का तापमान लगभग 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे ठंड का असर साफ तौर पर महसूस किया गया. सुबह के समय घना कोहरा छाया रहा. जिसने पूरे क्षेत्र को अपनी आगोश में ले लिया. यह कोहरा जब पहाड़ियों के नीचे बादलों के रूप में नजर आया, तो लोगों ने इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया.

सर्दियों में कोहरे की चादर ओढ़े नरवर पहाड़ियां, धरती के स्वर्ग सा मनमोहक नजारा सर्दियों में नरवर पहाड़ियों का दृश्य प्रकृति की अनोखी देन है. इतिहास, ठंडा मौसम, कोहरा और पहाड़ियों का संगम नरवर को सचमुच “धरती का स्वर्ग” बना देता है. जो भी एक बार सर्दियों में नरवर आता है, वह यहां की सुंदरता और शांति को लंबे समय तक याद रखता है.

नरवर क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और संभावनाओं से भरपूर है. प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक विरासत और शांत वातावरण का ऐसा संगम बहुत कम स्थानों पर देखने को मिलता है. सर्दियों के मौसम में जब कोहरा पहाड़ियों को अपनी चादर में ढक लेता है, तब नरवर का आकर्षण कई गुना बढ़ जाता है. यही कारण है कि यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों, इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक आदर्श पर्यटन स्थल बन सकता है.

नरवर किला इस क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण है. महाभारत काल से जुड़े इतिहास और राजा नल-दमयंती की कथाओं के कारण यह किला देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखता है. किले की ऊंचाई से दिखाई देने वाली घाटियां, पहाड़ियां और कोहरे से ढका दृश्य पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है. यदि यहां पर्यटन सुविधाओं का और विकास किया जाए, तो यह स्थान ऐतिहासिक पर्यटन के मानचित्र पर एक अहम पहचान बना सकता है.