उज्जैन के तोपखाना इलाके में पतंगों का कारोबार एक बार फिर रंग-बिरंगी पतंगों से गुलजार है। इस साल पतंगों की कीमतों में लगभग 25% की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि व्यापार अच्छा चल रहा है। बाजार में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम पर आधारित प्रधानमं
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तोपखाना क्षेत्र में लगभग 45 से 50 दुकानें हैं, जिनमें से अधिकांश मुस्लिम समुदाय के व्यापारियों द्वारा संचालित हैं। यह इलाका सालों से पतंगों के व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। व्यापारियों के अनुसार, बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है।
इस बार बाजार में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम वाली पतंगों की विशेष मांग है, जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें छपी हैं। इसके अलावा, बच्चे कार्टून चरित्रों वाली पतंगें भी पसंद कर रहे हैं।
पतंग उड़ाने के लिए ग्राहक देसी डोर को प्राथमिकता दे रहे हैं। ‘मयूर’ और ‘ब्लैक पैंथर’ जैसी प्रसिद्ध देसी डोर की खूब बिक्री हो रही है। इस साल ‘बरेली ड्रैगन डोर’ भी चर्चा में है, जिसे पूरी तरह भारतीय बताया जा रहा है और यह चाइना डोर को कड़ी टक्कर दे रही है।
कीमतों की बात करें तो, एक पतंग की कीमत 100 रुपए प्रति नग है। सस्ती डोर 120 रुपए से 500 रुपए (कोड़ी तक) में उपलब्ध है, जबकि ‘न्यू इंडिया डोर’ 350 रुपए से 1500 रुपए तक मिल रही है। ‘ड्रैगन डोर’ की कीमत 3500 रुपए तक है। चकरी 3500 रुपए से 4000 रुपए तक बिक रही है, जिसमें अब सोलर ऑटोमेटिक से चलने वाली चकरियां भी उपलब्ध हैं।
पतंग और चकरियां अब ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। बच्चों के लिए कार्टून पतंगों के साथ-साथ पतंगबाजी के लिए मास्क और चश्में भी बाजार में मिल रहे हैं। व्यापारियों का मानना है कि लोग एक बार फिर पुराने दौर की सुरक्षित और मनोरंजक पतंगबाजी की ओर लौट रहे हैं।