हाेशंगाबाद20 मिनट पहले
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- अधिकमास में ऑनलाइन कथा, पुण्यलाभ ले रहे श्रद्धालु
काेविड -19 संक्रमण ने तकनीक काे घर- घर में पहुंचा दिया है। ऑफिस का काम हाे, स्कूल की पढ़ाई हाे या महिलाओं की कुकिंग और क्राफ्ट क्लास सब ऑनलाइन हाे रहा है। पुरुषोत्तम मास में कथा भी ऑनलाइन हो रही है। तीन साल में एक बार अधिकमास में भी महिलाएं स्नान, पूजन और मंदिर में परिक्रमा कर तुलसी और भगवान विष्णु की विशेष पूजा करती है। पंडित कनक उपाध्याय ने बताया अधिकमास में 30 दिन विशेष कथा सुनने का महत्व है। इस बार संक्रमण के कारण मंदिर जाकर पूजा करना और कथा सुनना संभव नहीं हाे पा रहा है। ऐसे में ऑनलाइन अधिकमास की कथा की जा रही है।
इसलिए विशेष है अधिकमास
पृथ्वी और सूर्य की परिक्रमा क्रम के अनुसार सूर्य वर्ष 365 दिन 6 घंटे का हाेता है। जबकि चंद्रमा और पृथ्वी के परिक्रमा क्रम के चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है। सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच करीब 11 दिन का अंतर हाेता है। हर तीन साल में यह 11 दिनाें का अंतर करीब 1 माह के बराबर हाे जाता है। इसलिए तीन साल में एक बार अधिकमास आता है। इसी तरह हिंदी कैलेंडर में तिथियाें की गणना सूर्याेदय और सूर्यास्त के समय से की जाती है। ऐसे में कई तिथि दाे दिन तक रहती हैं ताे कई का समय कम हाेता है। ऐसे में ज्यातिषशास्त्रियाें ने कालगणना काे व्यवस्थित करने अधिकमास का संयाेजन किया है।
1 अक्टूबर काे अधिकमास की पूर्णिमा व सर्वार्थसिद्धी याेग भी
1 अक्टूबर काे अधिकमास की पूर्णिमा है। गुरुवार का दिन उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के वृद्धि योग के साथ इस दिन सर्वार्थसिद्धी याेग भी है। इस पूर्णिमा पर स्नान, व्रत और पूजन का विशेष महत्व है। सर्वार्थसिद्धी याेग हाेने के कारण इस दिन मांगलिक पूजन और खरीदी के भी शुभ मुहूर्त रहेंगे।
17 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र
श्राद्ध पक्ष के बाद 18 सितंबर से अधिकमास शुरू हुआ। जाे 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसके बाद 17 अक्टूबर से नवरात्रि की पूजा हाेगी। जबकि सामान्य वर्ष में श्राद्ध पक्ष के बाद सीधे नवरात्र शुरू हाेते हैं।