नई दिल्ली. विजय हजारे ट्रॉफी का फाइनल रविवार को बेंगलुरु में खेला जाएगा. दो बार चैंपियन विदर्भ और सौराष्ट्र की टीमें खिताब के लिए टकराएंगी. सौराष्ट्र पहली बार चैंपियन बनने उतरेगा. बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के मैदान पर दोनों टीमें कागज पर लगभग एक समान हैं. दोनों टीमों में कोई स्टार खिलाड़ी नहीं है लेकिन उनके पास ऐसे प्लेयर जरूर हैं जो एक्स फैक्टर लेकर आते हैं. सौराष्ट्र और विदर्भ के पास चार बल्लेबाज ऐसे हैं जो कभी भी अपने दम पर मैच का रुख मोड़ सकते हैं. सौराष्ट्र के कप्तान हार्विक देसाई 561 रन के साथ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं. उन्हें विश्वराज जडेजा का अच्छा साथ मिला है, जिन्होंने पंजाब के खिलाफ सेमीफाइनल में शतक लगाया था.
वहीं विदर्भ की बल्लेबाजी को अमन मोखाडे (781 रन) और ध्रुव शोरे (515 रन) ने मजबूती दी है. मोखाडे सलामी बल्लेबाज हैं और उन्होंने अब तक शानदार खेल दिखाया है. कर्नाटक के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने धैर्य के साथ शतक लगाया, जिससे उनके हुनर का पता चलता है. रविकुमार समर्थ ने भी मध्यक्रम में अच्छा योगदान दिया है और अब तक 427 रन बनाए हैं. सौराष्ट्र के तेज गेंदबाज अंकुर पंवार (21 विकेट) और चेतन सकारिया (15 विकेट) ने टीम के गेंदबाजी आक्रमण को अच्छे से संभाला है. दोनों ने नई गेंद और डेथ ओवरों में शानदार प्रदर्शन किया है. विदर्भ की गेंदबाजी में नचिकेत भूटे (15 विकेट) और यश ठाकुर (15 विकेट) ने अच्छा भरोसा दिलाया है और फाइनल में भी उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है. दर्शन नालकंडे (12 विकेट) भी विदर्भ को तेज गेंदबाजी का विकल्प देते हैं.
विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में रविवार को सौराष्ट्र का सामना विदर्भ से होगा.
हर्ष दुबे की बल्लेबाजों को रोकने की क्षमता काम आ सकती है
सेमीफाइनल के आखिरी ओवरों में उन्होंने कर्नाटक की बल्लेबाजी को तोड़ दिया, जिससे उनके हुनर और धैर्य का पता चलता है. फाइनल में टॉस काफी अहम हो सकता है क्योंकि दूसरी पारी में ओस पड़ती है, इसलिए जो भी टीम टॉस जीतेगी वह पहले गेंदबाजी करना चाहेगी. यहां सीओई के दोनों मैदानों पर खेले गए छह नॉकआउट मैचों में से चार बार लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम जीती है. यह ट्रेंड जारी रह सकता है, जिससे दूसरी पारी में स्पिनरों की भूमिका कम हो जाएगी. हालांकि विदर्भ के युवा कप्तान और बाएं हाथ के स्पिनर हर्ष दुबे की बल्लेबाजों को रोकने की क्षमता काम आ सकती है. ऐसी स्थिति में वही टीम जीत सकती है जो ज्यादा धैर्य और जज्बा दिखाएगी.
विश्वराज जडेजा कौन हैं, जिन्होंने सौराष्ट्र को अकेले दम पर दिलाया फाइनल का टिकट.
टीम इस प्रकार हैं:
विदर्भ: हर्ष दुबे (कप्तान), यश ठाकुर (उप-कप्तान), अथर्व तायडे, ध्रुव शौरी, अमन मोखाड़े, यश राठौड़, शिवम देशमुख (विकेटकीपर), अक्षय वाडकर, नचिकेत भुटे, दर्शन नालकंडे, आर समर्थ, पार्थ रेखाडे, दीपेश परवानी, प्रफुल्ल हिंगे, शुभम दुबे, गणेश भोसले.
सौराष्ट्र: हार्विक देसाई (विकेटकीपर/कप्तान), विश्वराज जड़ेजा, प्रेरक मांकड़, सम्मर गज्जर, चिराग जानी, रुचित अहीर, धर्मेंद्रसिंह जाडेजा, अंकुर पंवार, प्रशांत राणा, आदित्य जड़ेजा, चेतन सकारिया, हेतविक कोटक, प्रणव कारिया, युवराज चुडासमा, पार्थ भुट, तरंग गोहेल, जय गोहिल, अंश गोसाई, पार्श्वराज राणा, हितेन कंबी.