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रीवा के 64,215 किसानों को अब ई-टोकन प्रणाली से यूरिया और डीएपी खाद आसानी से मिलेगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कालाबाजारी पर रोक लगेगी. यह टोकन तीन दिन तक मान्य रहेगा और उसी अवधि में किसान अपने चयनित अधिकृत विक्रेता से खाद प्राप्त कर सकेगा.
Rewa News: रीवा के किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है. अब यूरिया और डीएपी खाद के लिए किसानों को न तो घंटों कतार में खड़ा होना पड़ेगा और न ही चक्काजाम जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा. शासन ने खाद वितरण व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल करते हुए ई-टोकन प्रणाली लागू कर दी है. इससे किसानों को उनकी खेती के रकबे के अनुसार तय समय पर खाद उपलब्ध कराई जाएगी. नई व्यवस्था के तहत किसान फार्मर आईडी आधार आधारित पंजीयन से घर बैठे या नजदीकी एमपी ऑनलाइन व सीएससी केंद्र से ई टोकन जनरेट कर सकेंगे.
यह टोकन तीन दिन तक मान्य रहेगा और उसी अवधि में किसान अपने चयनित अधिकृत विक्रेता से खाद प्राप्त कर सकेगा. रीवा के जिला किसान कल्याण तथा कृषि विकास उप संचालक यूपी बागरी ने बताया, जिले के 64,215 से अधिक किसानों को इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा. इससे न केवल खाद वितरण में पारदर्शिता आएगी, बल्कि कालाबाजारी पर भी प्रभावी रोक लगेगी.
इतने किसान पंजीकृत
जिले में 680 सहकारी समितियां और लगभग 1500 खाद विक्रेता पंजीकृत हैं. इनके तहत 64,215 किसान पंजीकृत हैं. ये किसान कुल 14.12 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खेती करते हैं. इसमें रीवा अग्रणी है. इनके लिए पिछले वर्ष यूरिया निजी खाद विक्रेताओं के पास 5342.03 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध थी, मांग इससे ज्यादा थी लेकिन खाद समय पर नहीं मिल पाया था. इस कारण से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था.
ई-टोकन केवल तीन दिन तक मान्य
कृषि विभाग के अनुसार, पोर्टल पर पंजीकृत किसान आधार नंबर के माध्यम से लॉगिन करेगा. किसान की भूमि, रकबा और फसल की जानकारी पहले से पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी. भूमि और फसल की वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर किसान को पात्रता अनुसार उर्वरक के लिए ई-टोकन जारी किया जाएगा. किसान अपने क्षेत्र के किसी भी अधिकृत विक्रेता या संस्था का चयन कर सकता है. ई-टोकन केवल तीन दिन तक मान्य रहेगा. निर्धारित समय में खाद नहीं लेने पर टोकल स्वत: निरस्त हो जाएगा और किसान को पुन: पंजीयन कराना होगा. योजना में भूमि पंजीयन और ई-केवाइसी अनिवार्य रखी गई है.
ई-टोकन जारी होने पर किसान को एसएमएस, मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से सूचना मिलेगी. टोकन में किसान का नाम, पंजीयन क्रमांक, उर्वरक का प्रकार और मात्रा, वितरण केंद्र, तिथि और समय अंकित होगा. इससे किसान को ये भरोसा रहेगा कि निर्धारित समय तक खाद उसके लिए सुरक्षित रहेगी.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें