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Greylag Goose in Sagar Nauradehi Tiger Reserver: नौरादेही टाइगर रिजर्व में इस बार 190 से ज्यादा प्रवासी पक्षी पहुंचे हैं. यूरोप से उड़कर आई सबसे बड़ी शाकाहारी बत्तख ग्रेलैग गूज ने सबको चौंका दिया. जानिए कैसे हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं ये पक्षी. क्यों सर्दियों में भारत बनता है इनका पसंदीदा ठिकाना.
अनुज गौतम, सागर: मध्य प्रदेश की विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं में फैला वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व इन दिनों किसी जन्नत से कम नहीं है. घने जंगल, पहाड़ों के बीच बहती नदियां और शांत तालाब… और इन्हीं के बीच इस बार 190 से ज्यादा प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाल लिया है. सर्दियों की शुरुआत होते ही ये मेहमान यहां पहुंचते हैं और फरवरी-मार्च तक यहीं रहते हैं.
यूरोप की ठंड से बचने हजारों किलोमीटर का सफर
यूरोपीय देशों में जब बर्फबारी तेज हो जाती है और तापमान माइनस में चला जाता है, तब ये पक्षी दक्षिण एशिया की ओर उड़ान भरते हैं. भारत जैसे देशों में 4 से 10 डिग्री का तापमान इनके लिए सबसे मुफीद होता है. हैरानी की बात ये है कि कई पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं, कुछ मध्य एशियाई इलाकों में प्रजनन भी करते हैं और जब बच्चे उड़ना सीख जाते हैं, तब उन्हें भी साथ लेकर लौटते हैं.
पहली बार दिखी सबसे बड़ी शाकाहारी बत्तख
इस बार नौरादेही टाइगर रिजर्व में एक खास मेहमान पहली बार नजर आया Greylag Goose. यह दुनिया की सबसे बड़ी शाकाहारी बत्तखों में गिनी जाती है. इसकी गुलाबी चोंच, हल्के डार्क पंख और बड़ा आकार इसे बेहद खूबसूरत बनाता है. लेकिन इसकी सबसे खास बात है इसका खान-पान यह पूरी तरह शाकाहारी होती है और पानी में उगने वाली घास व तिनके ही खाती है. घास खाने के लिए यह पानी में गोता भी लगाती है.
उड़ान से पहले खुद ही गिरा देती है पंख!
ग्रेलैग गूज से जुड़ा एक चौंकाने वाला सच भी है. जब ये यूरोप से हिमालय पार कर भारत की ओर आने वाली होती हैं, तो उससे पहले ये अपने पुराने पंख खुद गिरा देती हैं. इसे आप “नेचुरल सर्जरी” कह सकते हैं. कुछ समय तक इनके नए पंख आते हैं, लेकिन इस दौरान ये उड़ नहीं पातीं. यही वजह है कि इस समय इनके शिकार होने का खतरा भी बढ़ जाता है.
191 प्रजातियों ने डाला डेरा
टाइगर रिजर्व की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए. ए. अंसारी के मुताबिक, प्रवासी पक्षी मुख्य रूप से भोजन की तलाश में एशियाई देशों में आते हैं. इस बार करीब 191 प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जिनमें 6 तरह की बत्तखें शामिल हैं. कोई कीड़े-मकोड़े खाता है, कोई मछली का शिकार करता है, तो कोई पूरी तरह शाकाहारी है. यही विविधता नौरादेही को खास बनाती है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें