शाजापुर के कौटिल्य एज्यूकेशन एकेडमी के छात्र काव्यांश यादव का भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए चयन हुआ है। वे प्रदेश के उन चार युवाओं में शामिल हैं जिन्हें इस प्रतिष्ठित अवसर के लिए चुना गया है। काव्यांश अगले तीन महीनों तक जापान में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे। इसके बाद वे इसरो में वैज्ञानिक के रूप में शामिल होकर देश और दुनिया को अंतरिक्ष की गतिविधियों से अवगत कराएंगे। उन्होंने मंगलवार को एबी रोड स्थित एक निजी होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में अपनी इस यात्रा के बारे में जानकारी दी। काव्यांश ने बताया कि शाजापुर में उन्होंने कभी हेलिकॉप्टर नहीं देखा था। जब उनके पिता ने उन्हें हेलिकॉप्टर लाकर दिया, तब उन्हें पता चला कि पक्षियों के अलावा भी कोई चीज उड़ती है। बाद में उन्हें नासा के बारे में पता चला। खोज करने पर उन्हें जानकारी मिली कि अमेरिका के अलावा भारत में भी इसरो है। इसके बाद उन्होंने हेलिकॉप्टर छोड़कर रॉकेट का रास्ता चुना। उन्होंने इसरो में जाने का लक्ष्य निर्धारित किया और इसके लिए जेईई की तैयारी की, जिससे उन्हें आगे बढ़ने का मार्ग मिलता गया। आपदा को बनाया अवसर, 10 माह में निकाली जेईई मेंस व एडवांस पूरी दुनिया के साथ-साथ काव्यांश और उसके परिवार के लिए भी कोरोना काल बनकर आया। न पढ़ाई हो पा रही थी और ऑनलाईन पढ़ाई पर इतना भरोसा नहीं किया जा सकता था। लेकिन काव्यांश के बड़े भाई आर्यन उसकी ताकत बना और काव्यांश ने सबसे कठिन मानी जाने वाली जेईई मेंस व जेईई एडवांस की परीक्षा 10 माह में क्रेक करके आईआईएसटी में प्रवेश लिया। कोरोना में पूरी दुनिया थमी हुई थी लेकिन इस आपदा को काव्यांश ने अवसर में बदल दिया। जो तीन माह बाद उन नामी वैज्ञानिकों में शामिल होगा जिनके कारनामों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। स्कूल की पढ़ाई ने दिखाई राह कौटिल्य स्कूल संचालक ब्रजेश यादव और माता शशि यादव अपने स्कूल के बच्चों के साथ-साथ अपने बच्चों को भी हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। जब कोरोना का काल आया तब लोगों ने इसे आफत मान लिया, लेकिन इसी समय माता-पिता व भाई से मिला प्रोत्साहन और समय काव्यांश के लिए गोल्डन टाईम साबित हुआ और जेईई मंेस व जेईई एडवांस क्रेक करने में उसे काफी मदद मिली।
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