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chhatarpur suraj singh story : आप हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बताने जा रहे हैं जिसके अचूक निशानेबाजी के अंग्रेज भी फैन हो गए थे. दरअसल, छतरपुर के सूरज सिंह जो अपने अचूक निशाने के लिए जाने जाते थे. इनकी अचूक निशानेबाजी के चलते अंग्रेजों ने उनको फांसी से भी रिहा कर दिया था. क्या था वो किस्सा? आइए जानते हैं.
Ajab Gajab. आप हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बताने जा रहे हैं जिसके अचूक निशाने को देखकर अंग्रेज ने उनकी फांसी माफ कर दी थी. दरअसल, छतरपुर के सूरज सिंह का निशाना इतना अचूक था कि वह लौंग में भी दूर से सटीक निशाना मारते थे. इनकी अचूक निशानेबाजी के चलते अंग्रेजों ने उनको फांसी से भी रिहा कर दिया था. क्या था वो किस्सा? आइए जानते हैं.
कंधे पर टांगते थे कुल्हाड़ी और बंदूक
छतरपुर के सिंहपुर गांव के रहने वाले इंदल सिंह बताते हैं कि सूरज सिंह मेरे दादा यानी बब्बा थे और वह अपने अचूक निशानेबाजी के लिए जाने जाते थे. वह सिर्फ इंसान और जानवर पर हु निशाना नहीं लगाते थे बल्कि लौंग पर भी निशाना मारते थे. डोरी से लोंग टांग दी जाती थी और फिर उस पर निशाना मारते थे.
हमारे बब्बा के पास हमेशा बंदूक, कमान, कुल्हाड़ी रहती थी. ये सब हथियार कंधा पर रखकर चलते थे. अंग्रेजो के जमाने में फरारी काटते थे. जेल भी पन्ना की जेल तोड़कर भी भाग चुके हैं. अंग्रेजों ने उन्हें फांसी भी दे दी थी. लेकिन बब्बा की अचूक निशानेबाजी से अंग्रेज भी उनके फैन हो गए थे और उन्होंने बब्बा की फांसी रोक दी थी.
सरपंच पति ने बताया किस्सा
वही सिंहपुर सरपंच पति रुद्र प्रताप तिवारी बताते हैं कि हम भी सुनते आए हैं कि हमारे जो दादा थे उनके साथी सूरज सिंह रहे हैं और वह अपने अचूक निशाने के लिए जाने जाते थे. उनके पास भरतल बंदूक रहा करती थी. अंग्रेजो के जमाने में वह फरारी किया करते थे इसी के चलते उन्हें अंग्रेजों ने फांसी की सजा भी सुना दी थी. अंग्रेज उन्हें छतरपुर से इंदौर अपनी गाड़ी में लिए जा रहे थे लेकिन तभी एक ऐसी घटना होती है जिससे सूरज सिंह फांसी से रिहा कर दिए जाते हैं.
चलती गाड़ी से हिरणों का शिकार किया
दरअसल, भोपाल और इंदौर के बीच अंग्रेजों को हिरण दिखाई देते हैं और वह सूरज सिंह से कहते हैं कि “क्या तुम इन हिरणों का शिकार कर सकते हो? ” तब सूरज सिंह अंग्रेजों से कहता है ” जरूर साब! अगर आप आदेश करें तो मैं हिरणों को चलती गाड़ी से ही शिकार कर सकता हूं , बस आप मुझे अनपी बंदूक दे दें और बाकी टेंशन आप मुझ पर छोड़ दें.” इसके बाद अंग्रेज उसे अपनी बंदूक देते हैं और चलती हुई गाड़ी में सूरज सिंह 10 से 11 हिरणों का शिकार कर देते हैं.
छतरपुर राजा भवानी सिंह को चिट्ठी लिखी
इस अजब-गजब दृश्य को देखकर अंग्रेज भी हैरान हो जाते हैं और वह सूरज सिंह से बहुत प्रभावित हो जाते हैं. वह तुरंत सूरज सिंह को फांसी से रिहा कर देते हैं. साथ ही छतरपुर राजा भवानी सिंह को चिट्ठी भी लिखते हैं और कहते हैं कि हम इसे फांसी से रिहा कर रहे हैं और अब आपकी जिम्मेदारी है कि आप इसका खर्चा उठाएं और आपके यहां ही रहेगा.हालांकि सूरज सिंह राजा भवानी सिंह के यहां तो नहीं रहे अपने गांव सिंहपुर आ जाते हैं और यहीं पर रहने लगते हैं.
यह किस्सा हम अपने पिताजी से सुनते आए हैं. पिताजी को दादाजी ने बताया था. हालांकि यह किस्सा पूरे गांव में चर्चित है. गांव के बाहर भी लोगों को पता है कि अंग्रेजो के जमाने में सूरज सिंह भी था जो अपने अचूक निशाने के लिए जाना जाता था.
About the Author
7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें