जिला मुख्यालय का टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन, जहां प्रतिदिन औसतन दो हजार से अधिक यात्रियों का आवागमन होता है, आज खुद असुरक्षा का प्रतीक बनता जा रहा है। यात्रियों की बढ़ती भीड़, सीमित संसाधन और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों के कारण स्टेशन अपराधियों के लिए आसान ठिकाना बन गया है। हालात यह हैं कि स्टेशन पर न तो जीआरपी (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) की तैनाती है और न ही तत्काल शिकायत दर्ज कराने की कोई सुविधा उपलब्ध है। किसी वारदात की स्थिति में पीड़ित को पहले छतरपुर और फिर रीवा जाकर एफआईआर दर्ज करानी पड़ती है। इतनी जटिल प्रक्रिया के चलते अधिकांश यात्री शिकायत दर्ज कराने का विचार ही छोड़ देते हैं। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) झांसी के अधीन आने वाले इस स्टेशन पर आपराधिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह राम भरोसे है। जीआरपी की अनुपस्थिति का सीधा फायदा बदमाश उठा रहे हैं। मौके पर अपराधी पकड़ में आने के बावजूद कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाती। स्टेशन पर तैनात आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) यात्रियों से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज करने के लिए अधिकृत नहीं है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल और फुटेज का डिस्प्ले भी स्टेशन पर नहीं, बल्कि आरपीएफ थाना ललितपुर में है। आपात स्थिति में न तो स्टेशन प्रबंधन और न ही यात्री तुरंत फुटेज देख सकते हैं। 19 दिसंबर को बच्चा गुम होने की घटना ने रेलवे की इस अव्यवस्था और सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी। सीसीटीवी के फुटेज भी आरपीएफ थाना ललितपुर में होते हैं डिस्प्लें मोबाइल चोर पकड़ा, चलती ट्रेन में भागा
22 जनवरी को शहर निवासी राकेश कुमार जैन महामना एक्सप्रेस में पत्नी को बैठाने स्टेशन पहुंचे थे। भीड़ का फायदा उठाकर एक व्यक्ति ने उनका मोबाइल चोरी कर लिया। राकेश ने आरोपी को पकड़ लिया, लेकिन जीआरपी सहायता केंद्र न होने से उसे आरपीएफ चौकी ले गए। वहां कोई जवान मौजूद नहीं था। इसी दौरान ट्रेन चल पड़ी और बदमाश चलती ट्रेन में चढ़कर फरार हो गया। टीकमगढ़-खजुराहो व ओरछा रेल खंड में सिर्फ 3 जवान टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन दो हजार से अधिक यात्रियों की आवाजाही के बावजूद जीआरपी की तैनाती नहीं है। इस पर छतरपुर सहायता केंद्र प्रभारी बीएल कोरी ने बताया कि बल की भारी कमी है। छतरपुर–खजुराहो, हरपालपुर–ओरछा और छतरपुर–टीकमगढ़ क्षेत्र के लिए सिर्फ तीन जवान हैं। सहायता केंद्र में एफआईआर दर्ज नहीं होती, प्रकरण शून्य पर रीवा भेजे जाते हैं। यात्री सुरक्षा हमारी प्राथमिकता
सुगम यात्रा और यात्रियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मामले जीआरपी के अधीन आते हैं। यदि किसी स्टेशन पर जीआरपी की तैनाती नहीं है तो इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।
-मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, एनसीआर, झांसी
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