Hi Dadda गुड मॉर्निंग! प्लेन क्रैश से कुछ देर पहले शांभवी ने की थी दादी से बात, फिर ग्वालियर पहुंची मौत की खबर

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Ajit Pawar Plane Crash News: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान उड़ाने वाली पायलट शांभवी पाठक ग्वालियर की रहने वाली थीं. यहां उनकी दादी का घर है, जहां उनकी बचपन की तस्वीरें सजी हुई हैं. शांभवी ने हादसे से कुछ समय पहले ही अपनी दादी को मैसेज भेजा था. जानें दादी ने क्या बताया…

ग्वालियर स्थित घर में शोक में पायलट शांभवी की दादी.

Gwalior News: मुंबई से बारामती जा रहे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का चार्टर्ड विमान क्रैश हो गया. इसमें पायलट शांभवी पाठक सहित सभी सवारों की मौत हो गई. यह हादसा 28 जनवरी 2026 की सुबह करीब 8:45 बजे हुआ, जब विमान बारामती एयर स्ट्रिप पर लैंड करने वाला था. इसी दौरान विमान नियंत्रण खो बैठा और खेत में क्रैश हो गया. शांभवी पाठक इस प्लेन की फ्सर्ट ऑफिसर थी, जिन्होंने कमान संभाल रखी थी.

शांभवी पाठक मूल रूप से ग्वालियर की रहने वाली थीं. उनका बचपन ग्वालियर के एयर फोर्स कॉलोनी में ही बीता था. उनके पिता भारतीय वायुसेना में अधिकारी रह चुके हैं, जिस कारण उन्हें फाइटर प्लेन और उड़ान से बचपन से ही गहरा लगाव था. शांभवी ने ग्वालियर स्थित एयर फोर्स नंबर वन स्कूल में 2016 से 2018 तक पढ़ाई की. वह मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब की सदस्य भी थीं. यहां उन्होंने अपनी एविएशन ट्रेनिंग की शुरुआत की थी.
हादसे से कुछ घंटे पहले भेजा मैसेज
उनकी दादी मीरा पाठक फिलहाल ग्वालियर में रहती हैं. हादसे से कुछ घंटे पहले यानी बुधवार की सुबह 6:36 बजे शांभवी ने मुंबई से दादी को व्हाट्सऐप मैसेज भेजा था “गुड मॉर्निंग दद्दा”. इसके तुरंत बाद वे फ्लाइट पर पहुंचीं और उड़ान भर ली. दादी मीरा पाठक ने बताया कि शांभवी का घर ग्वालियर में अब भी उनकी बचपन की तस्वीरों से भरा पड़ा है, जहां वे फाइटर प्लेन के मॉडल्स के साथ खेलती दिखती हैं. परिवार का पूरा फोकस एविएशन पर था. शांभवी ने इसे अपना करियर बना लिया.
मुझे दादी कहलाना पसंद नहीं था…
दादी मीरा पाठक ने बताया, शांभवी का जन्म केडीजे नर्सिंगहोम मुरार में हुआ था. कुछ साल शांभवी ने ग्वालियर एयरफोर्स स्कूल विद्या भारती में पढ़ाई की. फिर दिल्ली में लोदी रोड स्थित बाल भारती में पढ़ीं. इसके बाद पायलट की ट्रेनिंग के लिए न्यूजीलैंड चली गईं. आगे कहा, वो मुझे ‘द्ददा’ ही बुलाती थी, क्योंकि मुझे दादी कहलाना पसंद नहीं था. हम लोग प्यार से उसे ‘चीनी’ बुलाते थे. हमें सुबह 11 बजे पता चला कि हादसा हो गया है. मैंने शांभवी के पापा को फोन किया तो वो रोने लगे.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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