साउथ अफ्रीका ने पिछले साल नवंबर 2025 में भारत दौरे पर दो मैचों की टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया को उसी के मैदान पर 2-0 से हराया था. भारतीय टेस्ट टीम हाल के समय में अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है, ऐसे में गौतम गंभीर पर तलवार लटकती हुई नजर आ रही है. हेड कोच गौतम गंभीर के लिए यह समय काफी मुश्किल रहा है, जिसमें साउथ अफ्रीका के खिलाफ घर पर 0-2 से टेस्ट हार और ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में हार शामिल है. हालांकि उनके कार्यकाल में सब कुछ खराब नहीं रहा है, लेकिन रेड-बॉल क्रिकेट में टीम इंडिया के गिरते प्रदर्शन ने उनकी चिंता बढ़ा दी है.
तेम्बा बावुमा का चौंकाने वाला बयान
साउथ अफ्रीका के टेस्ट कप्तान तेम्बा बावुमा का मानना है कि गौतम गंभीर की रेड-बॉल चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं. साल 2026 में सिर्फ पांच टेस्ट मैच होने हैं, जिनमें से दो न्यूजीलैंड में होंगे, जहां भारत ने आखिरी बार 2009/10 में सीरीज जीती थी, इसलिए आगे का रास्ता मुश्किल लग रहा है. तेम्बा बावुमा ने ESPNCricinfo के लिए अपने कॉलम में लिखा, ‘जब रेड-बॉल क्रिकेट की बात आती है, तो भारत निश्चित रूप से एक ट्रांजिशन वाली टीम रही है. टेस्ट क्रिकेट में भारत जिस स्थिति में है, उसमें कुछ भी अनोखा नहीं है. भारत के कोच गौतम गंभीर पर बहुत दबाव है. उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट में खुद के लिए समय निकालने का रास्ता खोजना होगा, और मेरा मानना है कि व्हाइट-बॉल क्रिकेट में प्रदर्शन से उन्हें मदद मिल सकती है.’
गौतम गंभीर को लेकर क्या बोले तेम्बा बावुमा
तेम्बा बावुमा ने बताया कि लिमिटेड-ओवर्स फॉर्मेट में भारत की बेंच स्ट्रेंथ गौतम गंभीर को थोड़ी राहत दे सकती है. लिमिटेड-ओवर्स क्रिकेट में, भारत के पास चुनने के लिए बहुत सारे रिसोर्स हैं. 2026 का T20 वर्ल्ड कप भी उनके फेवर में है, क्योंकि यह घरेलू मैदान पर होगा, जिसे फरवरी-मार्च में भारत और श्रीलंका मिलकर होस्ट करेंगे. वनडे में, कोहली और रोहित स्वाभाविक रूप से परफॉर्मेंस और लीडरशिप के नजरिए से बहुत ज्यादा जिम्मेदारी लेंगे. इसलिए मुझे लगता है कि गौतम गंभीर अपनी पोजिशन के मामले में ठीक रहेंगे. हालांकि, रेड-बॉल क्रिकेट के नजरिए से, आने वाले समय में इस भारतीय टीम के लिए मुश्किल होने वाली है.’
गंभीर का कॉन्ट्रैक्ट 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक
तेम्बा बावुमा ने कहा, ‘कुछ लोग शायद इस बात पर ज्यादा जोर देंगे कि गौतम गंभीर को व्हाइट-बॉल क्रिकेट में ही जारी रखना चाहिए और टेस्ट क्रिकेट की जिम्मेदारी किसी और को सौंप देनी चाहिए. रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल कोचिंग की भूमिकाओं को अलग-अलग करना कुछ ऐसा था जिसे हमने 2023 में प्रोटियाज सेटअप में आजमाया था.’ तेम्बा बावुमा ने कहा, ‘उस समय स्प्लिट रूल के पीछे कोई वजह थी, लेकिन अब सभी फॉर्मेट में एक ही कोच होने से खिलाड़ियों को कंटिन्यूटी के नजरिए से बहुत ज्यादा फायदा होता है. इसके अलावा, यह फिलॉसफी और खेलने के स्टाइल के नजरिए से भी फायदेमंद है. मुझे नहीं लगता कि अब ज्यादा टीमें स्प्लिट-फॉर्मेट सिस्टम अपना रही हैं, और सच कहूं तो, मैं इस नियम के पक्ष में नहीं हूं. अगर कुछ होता भी है, तो इससे खिलाड़ियों में कन्फ्यूजन होता है, क्योंकि एक फॉर्मेट में एक खास तरह की भाषा बोली जाती है और फिर दूसरे फॉर्मेट में, कुछ हफ्ते बाद में आपको एडजस्ट करना पड़ता है. गंभीर का कॉन्ट्रैक्ट 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक है और भारत को बस उनका साथ देना चाहिए.’