रैगिंग पर बवाल…छात्रों ने एक-दूसरे को लाठी-डंडे, बेल्ट से पीटा: आधा दर्जन मेडिकल छात्रों के सिर फूटे; रीवा में छात्रों में हिंसक संघर्ष – Rewa News

रैगिंग पर बवाल…छात्रों ने एक-दूसरे को लाठी-डंडे, बेल्ट से पीटा:  आधा दर्जन मेडिकल छात्रों के सिर फूटे; रीवा में छात्रों में हिंसक संघर्ष – Rewa News




रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में रैगिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद सोमवार को हिंसक संघर्ष में बदल गया। यूजी हॉस्टल से शुरू हुई मारपीट संजय गांधी अस्पताल की इमरजेंसी तक पहुंच गई, जहां गंभीर मरीजों और उनके परिजनों के बीच छात्रों ने एक-दूसरे को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। घटना के वीडियो सोमवार रात सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर यूजी हॉस्टल में सीनियर छात्रों ने फ्रेशर्स की रैगिंग शुरू की। जूनियर छात्रों के विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और हाथापाई शुरू हो गई। आरोप है कि सीनियर छात्रों ने हॉस्टल में रखी लाठियों और बेल्ट से हमला किया। इस मारपीट में करीब आधा दर्जन जूनियर छात्र घायल हो गए, जिनके सिर फूटे हैं। इमरजेंसी वार्ड और गलियारों में भी मारपीट
घायल छात्रों को संजय गांधी अस्पताल के आकस्मिक वार्ड में भर्ती कराया गया। शाम होते-होते अस्पताल में दोनों गुट आमने-सामने आ गए और इमरजेंसी वार्ड व गलियारों में फिर से हिंसा शुरू हो गई। छात्रों ने अस्पताल परिसर में एक-दूसरे का पीछा कर लात-घूंसे और डंडों से पिटाई की। देखिए तस्वीरें मरीज और परिजनों को भागना पड़ा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उस समय इमरजेंसी वार्ड में सैकड़ों गंभीर मरीज और उनके परिजन मौजूद थे, जिन्हें इलाज छोड़कर इधर-उधर भागना पड़ा। आरोप है कि मौके पर तैनात सुरक्षा कर्मी भी हस्तक्षेप नहीं कर पाए। डीन मौके पर पहुंचे, कार्रवाई का दिलाया भरोसा
घटना की सूचना मिलते ही श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल मौके पर पहुंचे और जूनियर छात्रों की शिकायत सुनकर दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। वहीं, संजय गांधी अस्पताल की सीएमओ डॉ. इशिता अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल परिसर में हुई मारपीट गंभीर मामला है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पहले भी हुए रैगिंग के लेकर विवाद
गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में पहले भी रैगिंग को लेकर विवाद और मारपीट के आरोप लगते रहे हैं। हर बार कार्रवाई के आश्वासन के बाद मामला शांत हो जाता है। इस बार सवाल यह उठ रहा है कि जब अस्पताल की इमरजेंसी जैसे संवेदनशील स्थान पर हिंसा हुई, तो मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी?



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