मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हरदा में प्रदर्शन किया। संघ ने फसल गिरदावरी के लिए लागू जियो फेंस तकनीक में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को उजागर करते हुए इसे स्थगित करने की मांग की। इसके साथ ही अन्य लंबित समस्याओं के निराकरण की मांग भी उठाई गई। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के आह्वान पर उपप्रांताध्यक्ष राजीव जैन और जिलाध्यक्ष अनुराग करोलिया के नेतृत्व में पटवारियों ने संयुक्त कलेक्टर सतीश राय को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन प्रमुख सचिव राजस्व एवं आयुक्त भू-अभिलेख के नाम था, जिसमें पटवारियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और मांगों का उल्लेख किया गया। सरकारी ऐप और संसाधनों की कमी से काम प्रभावित
संघ ने बताया कि गिरदावरी के लिए उपयोग में लिया जा रहा सरकारी ऐप रियल टाइम डेटा से अपडेट नहीं है। इसके अलावा पटवारियों को कार्य के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। अभी तक पटवारियों को मोबाइल फोन तक प्रदान नहीं किए गए, जिससे डिजिटल कार्य बाधित हो रहा है। सर्वेयरों को मानदेय नहीं, बढ़ा पटवारियों पर बोझ
पटवारी संघ ने बताया कि पिछले लगभग तीन वर्षों से सर्वेयरों से गिरदावरी का कार्य कराया जा रहा है, लेकिन उन्हें अब तक मानदेय का भुगतान नहीं किया गया। इसी कारण सर्वेयर कार्य नहीं कर रहे हैं और गिरदावरी का पूरा भार पटवारियों पर आ गया है। जहां एक सर्वेयर के लिए अधिकतम 1000 खसरों की गिरदावरी का प्रावधान है, वहीं वर्तमान में पटवारियों को अपने हल्कों के गांवों में 5 से 10 हजार खसरों की गिरदावरी स्वयं करनी पड़ रही है। खसरा आधारित जियोटैग गिरदावरी संभव नहीं
संघ का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में खसरों की खसरा आधारित जियोटैग गिरदावरी करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए मांग की गई है कि पटवारी आईडी से खसरा आधारित जियोटैग हटाकर ग्राम स्तर पर गिरदावरी करवाने की व्यवस्था लागू की जाए। फार्मर आईडी में आ रही कई व्यावहारिक दिक्कतें
जिलाध्यक्ष अनुराग करोलिया ने फार्मर आईडी बनाने में आ रही समस्याओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि फार्मर आईडी पटवारियों के अलावा सीएससी सेंटर और एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भी बनाई जा रही है, जिनके लिए भुगतान भी किया जा रहा है। इसके बावजूद शासन द्वारा पटवारियों पर इस कार्य को लेकर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। फार्मर आईडी प्रणाली में बताई गई विसंगतियां
पटवारी संघ ने फार्मर आईडी सिस्टम में कई तकनीकी और प्रशासनिक विसंगतियां गिनाईं, जिनमें कई खातेदारों और सहखातेदारों का अन्य स्थानों पर निवास पोर्टल पर त्रुटिपूर्ण डेटा आईडी बन जाने के बाद भी खसरों का पेंडिंग सूची में दिखना कई खसरों का पोर्टल पर उपलब्ध न होना किसान के आधार से मोबाइल नंबर लिंक न होना ओटीपी नहीं मिलने या किसानों द्वारा ओटीपी नहीं देने की समस्या
शामिल हैं। अनावश्यक दबाव और कार्रवाई बंद करने की मांग
संघ ने मांग की कि इन सभी समस्याओं का शीघ्र निराकरण किया जाए और इस कार्य को लेकर पटवारियों पर अनावश्यक दबाव या कार्रवाई कर उन्हें प्रताड़ित न किया जाए। ज्ञापन में पटवारी संघ ने वेतन-भत्तों, आबादी सर्वे के लंबित मानदेय का भुगतान करने तथा नवीन पटवारियों को न्यायालय के आदेशानुसार शत-प्रतिशत वेतन देने की मांग भी रखी है।
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