AB Road flyover Indore: रोज सुबह-शाम ट्रैफिक जाम से जूझ रहे इंदौरवासियों के लिए अब राहत की खबर है. शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली एबी रोड पर लगने वाले भारी जाम और लंबे सिग्नल से जल्द ही निजात मिलने वाली है. दरअसल, इंदौर को करीब 7 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर मिलने जा रहा है, जिसकी लागत लगभग 350 करोड़ रुपये होगी. इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही लोगों का सफर आसान, तेज और सुकून भरा हो जाएगा.
LIG से नवलखा तक दौड़ेगा एलिवेटेड कॉरिडोर
यह एलिवेटेड कॉरिडोर इंदौर की एबी रोड पर LIG चौराहे से शुरू होकर गिटार चौराहा, पलासिया, गीता भवन, शिवाजी वाटिका, GPO होते हुए नवलखा तक जाएगा. इस पूरे रूट पर तीन बड़ी रोटरी बनाई जाएंगी, जो LIG, शिवाजी वाटिका और नवलखा पर होंगी. इसके अलावा गिटार चौराहा और व्हाइट चर्च रोड जैसे अहम स्थानों पर कनेक्टिंग आर्म्स भी दिए जाएंगे, ताकि अंदरूनी सड़कों से आने वाला ट्रैफिक भी सीधे कॉरिडोर से जुड़ सके.
45 मिनट का सफर होगा सिर्फ 15 मिनट में
इस एलिवेटेड कॉरिडोर के बनने के बाद एबी रोड के प्रमुख चौराहों पर लगने वाले सिग्नल का झंझट खत्म हो जाएगा. राजीव गांधी चौराहे से LIG तक का सफर, जो अभी ट्रैफिक में फंसकर 40 से 45 मिनट का हो जाता है, वह महज 15 मिनट में पूरा हो सकेगा. इससे न सिर्फ समय बचेगा बल्कि ईंधन और पैसे की भी बड़ी बचत होगी.
4 लेन का होगा कॉरिडोर, डिजाइन फाइनल
शुरुआत में इस कॉरिडोर को 6 लेन का बनाने की योजना थी, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसे 4 लेन का बनाने पर फैसला लिया गया. साथ ही फ्लाईओवर पर दी जाने वाली भुजाओं (रैम्प) का भी सर्वे किया जाएगा और उनकी उपयोगिता के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. अन्य चौराहों पर अतिरिक्त भुजाएं देने की मांग को लेकर PWD विभाग जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगा.
15 फरवरी से शुरू होगा नींव का काम
फिलहाल प्रस्तावित रूट पर मिट्टी की टेस्टिंग का काम चल रहा है. अधिकारियों के मुताबिक 15 फरवरी से नींव का काम भी शुरू कर दिया जाएगा. इसके साथ ही भारी मशीनरी की तैनाती होगी और ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर भी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे.
4 साल से अटका प्रोजेक्ट अब पटरी पर
नवलखा से इलायची तक बनने वाला यह एलिवेटेड कॉरिडोर पिछले करीब 4 सालों से अटका हुआ था. साल 2009 में केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी दी थी और 350 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिली थी. फरवरी 2021 में गुजरात की कंपनी राजकमल बिल्डर्स को ठेका दिया गया, लेकिन डिजाइन, ट्रैफिक और बस रूट से जुड़ी दिक्कतों के चलते काम शुरू नहीं हो सका. अब तय हो गया है कि पुरानी डिजाइन के आधार पर ही निर्माण किया जाएगा.
2 साल में पूरा होने का अनुमान
PWD अधिकारियों का कहना है कि अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक चला, तो यह एलिवेटेड कॉरिडोर करीब 2 साल में बनकर तैयार हो जाएगा. इसके बाद इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा और लोगों की रोजमर्रा की भागदौड़ काफी आसान हो जाएगी.