उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, हर छींक को अशुभ मानना सही नहीं है. शकुन शास्त्र में छींक के शुभ या अशुभ होने का निर्णय उसके समय, दिशा, संख्या और उस वक्त की परिस्थिति पर निर्भर करता है. कई बार छींक आने को यात्रा में रुकावट का संकेत माना जाता है, तो कई स्थितियों में यही छींक सफलता, धन लाभ और अच्छे समाचार का संकेत भी देती है. आचार्य बताते हैं कि सुबह के समय या किसी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले आई छींक, यदि सही परिस्थिति में हो तो सकारात्मक परिणाम दे सकती है. वहीं, कुछ समय और संदर्भों में छींक सावधानी बरतने का संकेत भी मानी जाती है, इसलिए हर छींक को नकारात्मक मानकर भयभीत होने की बजाय उसके संकेत और संदर्भ को समझना जरूरी है. शकुन शास्त्र हमें यही सिखाता है कि जीवन की छोटी-छोटी घटनाएं भी कई बार बड़े संकेत दे जाती हैं. शकुन शास्त्र के अनुसार, छींक को केवल शरीर की स्वाभाविक क्रिया नहीं माना गया है, बल्कि इसे भविष्य से जुड़े संकेतों से भी जोड़ा जाता है.