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बीसीबी अपने खिलाड़ियों के हितों की बेहतर रक्षा कर सकता था. 2028 से 2031 के बीच एक आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी हासिल करना, विश्व कप से चूकने के बदले कभी पर्याप्त मुआवजा नहीं हो सकता. अंततः बांग्लादेश को यह एहसास होगा कि वास्तव में नुकसान उसी का हुआ है.
आईसीसी की पहले से भले ही मामला हो गया हो शांत, पर इससे बांग्लादेश को हुआ भारी नुकसान
नई दिल्ली. भावनाओं से परे एक तार्किक विश्लेषण यह संकेत देता है कि इस पूरे घटनाक्रम में वास्तविक हार केवल बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) की हुई है. पाकिस्तान विश्व कप खेल रहा है और आगे भी खेलता रहेगा. भारत–पाकिस्तान मुकाबले हो रहे हैं और आईसीसी को अंततः कोई नुकसान नहीं होगा. बीसीसीआई, जो विश्व क्रिकेट का सबसे समृद्ध बोर्ड है, आईसीसी की आय पर निर्भर भी नहीं है और उस पर किसी प्रभाव की संभावना भी कम थी.
एसोसिएट देशों को जरूर झटका महसूस हुआ, यही कारण था कि एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड ने वह पत्र लिखा संवाद हुआ और अधिकांश पक्षों के लिए अंतिम परिणाम सकारात्मक रहा. लेकिन बांग्लादेश विश्व कप नहीं खेल रहा है और उनके खिलाड़ी घर बैठकर स्कॉटलैंड को अपनी जगह खेलते हुए देख रहे हैं.
खाया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा 12 आना
बीसीबी, चाहती तो मुस्तफिजुर रहमान आईपीएल मुद्दे को उठाकर बीसीसीआई के खिलाफ समर्थन जुटा सकती थी लेकिन इसे आईसीसी और विश्व क्रिकेट के खिलाफ लड़ाई बना देना सबसे बड़ी भूल साबित हुई. जैसा कि शुरुआत में कहा गया, इस पूरे घटनाक्रम में केवल एक ही वास्तविक पराजित है और वह है बांग्लादेश क्रिकेट. अमीनुल इस्लाम बुलबुल लाहौर गए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आगे कोई और प्रतिबंध न लगे, लेकिन पीछे मुड़कर देखने पर वे भी मानेंगे कि बीसीबी अपने खिलाड़ियों के हितों की बेहतर रक्षा कर सकता था. 2028 से 2031 के बीच एक आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी हासिल करना, विश्व कप से चूकने के बदले कभी पर्याप्त मुआवजा नहीं हो सकता. अंततः बांग्लादेश को यह एहसास होगा कि वास्तव में नुकसान उसी का हुआ है.
चुनाव के चक्कर में सब गंवाया
बांग्लादेश में एक दिन बाद चुनाव होने हैं और बेचैनी साफ महसूस की जा सकती है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार व्यापक आक्रोश है और हिंसा आम होती जा रही है. अंतरराष्ट्रीय पत्रकार और पर्यवेक्षक चुनाव की निगरानी के लिए देश में मौजूद हैं, लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जो भारत में चल रही क्रिकेट कार्रवाई से वंचित है. टीम को यहां होना चाहिए था उन्हें खेलना चाहिए था प्रशंसकों और देश के लिए. बांग्लादेश भले ही प्रतिबंधों और आर्थिक दंड से बच जाए, लेकिन खिलाड़ियों को विश्व कप खेलने का जो अवसर गंवाना पड़ा, उसे कोई वापस नहीं ला सकता. यह बात राजनेताओं को समझनी चाहिए. उनके लिए यह सिर्फ एक टूर्नामेंट हो सकता है खिलाड़ियों और प्रशंसकों के लिए यह उससे कहीं अधिक है.