रातापानी टाइगर रिजर्व…: बफर जोन में 20 अवैध ईंट भट्टे, जहरीले धुएं से ग्रामीण हो रहे बीमार, वन्यजीव भी खतरे में – Bhopal News

रातापानी टाइगर रिजर्व…:  बफर जोन में 20 अवैध ईंट भट्टे, जहरीले धुएं से ग्रामीण हो रहे बीमार, वन्यजीव भी खतरे में – Bhopal News




राजधानी के समीप स्थित रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कम से कम 20 ईंट भट्टे अवैध रूप से चल रहे हैं। सरकारी जमीन पर नदी और नालों के किनारे इन ईंट भट्टों के लिए मिट्टी की खुदाई करने से किनारों का कटाव बढ़ रहा है, जो पर्यावरण के लिहाज से खतरनाक है। भट्टों में ईंट पकाने के लिए प्लास्टिक और अन्य कचरे का उपयोग किया जा रहा है। इससे निकलने वाले जहरीले धुएं और राख से आसपास के गांवों और जंगल में हवा प्रदूषित हो रही है। जिससे ग्रामीण बीमार हो रहे हैं। रायसेन जिले के ओबेदुल्लागंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बमनई के सरपंच की शिकायत पर एनजीटी ने सख्त रूख अपनाते हुए रायसेन कलेक्टर, डीएफओ और पीसीबी की संयुक्त समिति गठित की है। एनजीटी ने समिति को मौका मुआयना कर 6 हफ्ते में रिपोर्ट और कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने को कहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस प्रकरण में नोडल एजेंसी बनाया गया है। हवा-पानी दूषित; एनजीटी ने निगम से पूछा सवाल सरपंच द्वारा दायर शिकायत में कहा गया है कि बमनई, नसीपुर, करमई, जौंदरा, कुकाखाऊ और बिरान गांव टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में आते हैं, जहां लगभग 15 से 20 ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। शिकायत में कहा है कि भट्टों से निकलने वाली राख बारिश के दौरान जल स्रोतों में मिल जाती है। नतीजा ग्रामीणों में श्वसन संबंधी रोग, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसका प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं के साथ पालतू पशुओं और वन्यजीवों पर भी पड़ रहा है। शिकायत में दिए तथ्यों के आधार पर एनजीटी ने माना कि यह गतिविधि हवा और जल स्रोतों को दूषित कर रही है और वन क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा रही है। एनजीटी ने नगर निगम से पूछा क्या बैरागढ़ ट्रांसफर स्टेशन वेटलैंड के अंदर बना है? एनजीटी का सवाल: क्या बैरागढ़ ट्रांसफर स्टेशन वेटलैंड के भीतर?
कचरा प्रबंधन और कचरे से बिजली बनाने के प्लांट से जुड़ी याचिका पर सुनवाई में एनजीटी ने निगम से पूछा है कि क्या बैरागढ़ ट्रांसफर स्टेशन वेटलैंड के अंदर बना है। यह आरोप याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना ने लगाया है। एनजीटी ने निगम को अगली सुनवाई में जवाब देने को कहा है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता के अनुसार, भोपाल डंप साइट मामले में सुप्रीम कोर्ट में 19 फरवरी को सुनवाई है, जबकि एनजीटी में अगली तारीख 21 फरवरी तय है। रातापानी के बफर जोन में 15-20 अवैध ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। भट्टों से निकलने वाली राख और जहरीला धुआं आसपास के जंगल और कृषि भूमि को प्रभावित कर रहा है। अवैध खनने भी हो रहा है। ये फोटो 6 महीने पुराना है। 2500 एकड़ में सीवेज के पानी से उग रहीं सब्जियां, एनजीटी ने मांगी रिपोर्ट लहारपुर डैम में गिर रहे सीवेज के पानी से 2500 एकड़ में उग रही सब्जियों के मामले में एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने जल संसाधन विभाग, राज्य वेटलैंड अथॉरिटी, कलेक्टर और केंद्रीय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से छह सप्ताह में जांच व कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2026 को होगी। सुनवाई में सामने आया कि बागमुगालिया स्थित लहारपुर डैम में चार बड़े ड्रेनेज और कई सीवर नाले बिना ट्रीटमेंट गिर रहे हैं। इसी दूषित पानी से अमरावत खुर्द, लहारपुर, बागमुगालिया, बागसेवनिया, बरखेड़ा पठान और पिपलियां पेंदे खां सहित 10-12 गांवों की 2500 एकड़ भूमि सिंचित है। शहर में पातरा नाला, कलियासोत नदी सहित अन्य नालों के किनारे रोज करीब 8 टन सब्जियां उग रहीं। बावड़िया कलां, खजूरी कलां, शाहपुरा व रायसेन रोड क्षेत्र में 4 हजार हेक्टेयर में सीवेज फार्मिंग जारी है। इससे विशेषज्ञों ने ई-कोलाई संक्रमण का खतरा बताया। एनजीटी 12 वर्ष पूर्व सीवेज फार्मिंग पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दे चुका है।



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