उमरिया में नंदी पर सवार होकर निकले महादेव: सागरेश्वर धाम में 11 फीट ऊंची झांकी रही आकर्षण; अमोलखोह में 21 किलो फूलों से श्रृंगार – Umaria News

उमरिया में नंदी पर सवार होकर निकले महादेव:  सागरेश्वर धाम में 11 फीट ऊंची झांकी रही आकर्षण; अमोलखोह में 21 किलो फूलों से श्रृंगार – Umaria News




उमरिया में महाशिवरात्रि पर जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण अंचल तक आस्था का अनूठा प्रबंधन और उत्साह देखने को मिला। नगर के प्रमुख सागरेश्वर महादेव मंदिर में इस बार दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश सीमित कर बाहर विशेष बैरिकेड्स लगाए गए, जहां से पाइप के माध्यम से जलाभिषेक की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। सुबह 4 बजे से ही भक्तों का तांता लग गया था, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सेवादारों की 50 सदस्यीय टीम तैनात रही। 11 फीट ऊंची झांकी, ड्रोन से निगरानी शाम के समय नगर में शिव बारात का आयोजन किया गया, जो इस बार अपनी भव्यता के कारण चर्चा में रही। बारात में भगवान शिव की 11 फीट ऊंची विशेष झांकी सजाई गई, जिसमें महादेव नंदी पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। यह बारात प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस सागरेश्वर धाम पहुंची। बारात के दौरान सुरक्षा के लिहाज से पूरे रूट पर ड्रोन से निगरानी रखी गई। बिरसिंहपुर पाली स्थित मां बिरासनी शक्तिपीठ में भी शिव-शक्ति के मिलन के इस पर्व पर विशेष इंतजाम किए गए, जहाँ कतारबद्ध होकर हजारों श्रद्धालुओं ने मत्था टेका। 21 किलो गुलाब से सजा अमोलखोह दरबार नौरोजाबाद स्थित प्रसिद्ध अमोलखोह आश्रम और चंदिया के शिव धाम में भगवान भोलेनाथ का मनमोहक श्रृंगार किया गया। पुजारी के अनुसार, बाबा के दरबार को सजाने के लिए जबलपुर और नागपुर से विशेष रूप से 21 किलो सुर्ख गुलाब और 11 किलो पीले गेंदे के फूल मंगवाए गए थे। महादेव के मस्तक पर भस्म और चंदन का विशेष लेपन कर उन्हें ‘महाकाल’ स्वरूप दिया गया। रात भर चलने वाले चार प्रहर के पूजन के लिए शुद्ध घी और विशेष जड़ी-बूटियों से युक्त 5 किलो पंचामृत तैयार किया गया। भजन-कीर्तन और प्रसादी का प्रबंधन जिले के विभिन्न शिवालयों में दिनभर भजन-कीर्तन का दौर चला। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए फलहारी खिचड़ी और ठंडाई का वितरण किया गया। सिविल लाइन और हवेली रोड स्थित मंदिरों में करीब 5 क्विंटल साबूदाने की खिचड़ी तैयार की गई थी, जिसके लिए 10 बड़े चूल्हे जलाए गए। शाम की महाआरती के बाद भक्तों ने भगवान शिव की ज्योत में आहुतियां दीं और शिव चालीसा का सामूहिक पाठ कर सुख-समृद्धि की कामना की।



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