Last Updated:
Jabalpur News: NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत साहू ने लोकल 18 से कहा कि 25 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां मवेशियों का जमावड़ा ज्यादा रहता है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. इन स्थानों पर 125 से ज्यादा लाल बॉक्स बनाए गए हैं.
जबलपुर. अगर आप NH-30 से गुजर रहे हैं और सड़क के बीचोंबीच बड़े लाल रंग के बॉक्स नजर आएं, तो चौंकिएगा मत क्योंकि ये बॉक्स आपकी और बेजुबान जानवरों की सुरक्षा के लिए लगाया गया खास ‘रेड अलर्ट’ है. जबलपुर-भोपाल रूट पर नौरादेही अभ्यारण की लाल सड़क की तर्ज पर इसे तैयार किया गया है. सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए NHAI ने यह अनोखी पहल शुरू की है. दरअसल हाईवे पर आवारा मवेशियों की वजह से लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए खतरनाक ‘ब्लैक स्पॉट’ की पहचान की गई. इन्हीं स्थानों पर 2×3 मीटर के बड़े लाल बॉक्स बनाए गए हैं, जिन पर सफेद अक्षरों में साफ लिखा है, मवेशी बाहुल्य क्षेत्र.
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत साहू ने लोकल 18 को बताया कि 25 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां मवेशियों का जमावड़ा अधिक रहता है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. इन जगहों पर 125 से ज्यादा लाल बॉक्स बनाए गए हैं. खास बात यह है कि इन बॉक्स में रिफ्लेक्टिव पेंट और थर्मोप्लास्टिक रोड मार्किंग का इस्तेमाल किया गया है, जो रात में गाड़ियों की हेडलाइट पड़ते ही रेडियम की तरह चमकता है. अक्सर रात के समय हाईवे के बीच मवेशी बैठे रहते हैं और तेज रफ्तार वाहन चालकों को संभलने का मौका नहीं मिलता. अब ये लाल बॉक्स दूर से ही खतरे का संकेत देंगे.
बरसात में मिलती है शिकायत
उन्होंने बताया कि इन बॉक्स को 200 किलोमीटर की रेंज में बनाया गया है. एक स्पॉट में चार बॉक्स बनाए गए हैं. बारिश के दिनों में अक्सर ये शिकायत मिलती है कि नेशनल हाईवे पर बहुत सारे मवेशी बैठे रहते हैं. उनको हटाने का प्रयास हमारे द्वारा लगातार किया ही जाता है. इसके अलावा वहां चालकों को एडवांस वार्निंग मिल जाए, इसलिए हम साइन बोर्ड लगा रहे हैं. हमने कुछ जगहें चिन्हित की हैं, जहां अक्सर मवेशी बैठते हैं. वहां साइन बोर्ड के साथ रेड मार्किंग कर वाहनों को अलर्ट करने के लिए संदेश लिखे हैं.
एक बॉक्स का खर्च 3000 रुपये
लाल बॉक्स के नजदीक रिफ्लेक्टेड साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं, जो ड्राइवरों को अतिरिक्त चेतावनी देंगे. हर एक बॉक्स को तैयार करने में करीब 3000 रुपये खर्च किए गए हैं. मकसद है कि वहां चालक ये वार्निंग पढ़कर अपनी गति धीमी करें. वहीं इन मार्किंग में छोटी से बड़ी गाड़ियों में कोई फिसलन नहीं होती. फिलहाल NHAI की इस पहल की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है. बहरहाल अब देखना होगा कि यह प्रयोग सड़क सुरक्षा के लिहाज से कितना कारगर साबित होगा.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.