बिना पंडित, बिना मंत्र, दिन में की शादी, वजह सुन घूम जाएगा सिर! लोग बोले… कोर्ट मैरिज कर लेते

बिना पंडित, बिना मंत्र, दिन में की शादी, वजह सुन घूम जाएगा सिर! लोग बोले… कोर्ट मैरिज कर लेते


Chhatarpur News: छतरपुर के मढ़ा गांव में हुई एक शादी की खूब चर्चा हो रही है. चर्चा का कारण दूल्हा-दुल्हन पक्ष की ‘महान’ सोच है. इसी सोच के कारण विवाह में पंडितजी को नहीं बुलाया गया. बिना मंत्र पढ़े, बिना रीति-रिवाजों के विवाह सपन्न हो गया. फिजूलखर्ची रोकने के लिए आतिशबाजी नहीं की गई. हालांकि, शादी के अन्य ताम-झाम में कमी नहीं रही. खास बात ये कि शादी रात के बजाय दिन में की गई, ताकि विवाह का आयोजन नशामुक्त रहे.

मढ़ा गांव का रहने वाले पटेल परिवार का कहना है, ”पुरानी मान्यताओं की जंजीरों से निकलने का समय आ गया है. अब हम शादियों में बदलाव चाहते हैं”. परिवार के सदस्यों ने लोकल 18 को बताया, छतरपुर के मढ़ा गांव में संपन्न हुई भरत और गीता की ये शादी पूरी तरह से संवैधानिक है. पाखंडवाद और अंधविश्वास रहित है. ये शादी तर्कवादी विचारधारा, समानतावादी विचारधारा वाली शादी है. हम पाखंडवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहते थे.

नशामुक्त, एक्सीडेंट रहित शादी!
परिवार का दावा है कि ये शादी हमने दिन में इसलिए रखी, क्योंकि रात में लोग नशा करके ही शादियों में आते हैं. शादियों में नशा करना आम बात हो गई है. हम इस शादी को नशामुक्त बनाना चाहते थे. साथ ही रात की शादियों में लोग जगते हैं, नींद पूरी नहीं हो पाती है. फिर सुबह आना-जाना करते हैं तो एक्सीडेंट होते हैं, इसलिए ये शादी दिन में की है.

बगैर मंत्रों के शादी संपन्न 
वर पक्ष से आस्था पटेल बताती हैं, मढ़ा गांव की शादी इसलिए चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि हमनें इस शादी में मंत्र पढ़ने के लिए पंडितजी को नहीं बुलाया. हालांकि, इस शादी में सभी समाज का समावेश है. हम धर्म के साथ हैं, लेकिन पाखंड के खिलाफ हैं. साथ ही हमनें फालतू खर्च पर भी लगाम लगाया है.

आतिशबाजी पर रोक 
आस्था बताती हैं कि शादियों में रात के समय आतिशबाजी बहुत होती है. इन आतिशबाजी से गांवों में कच्चे घरों में आग भी लग जाती है, इसलिए ये शादी दिन में रखी और इस शादी में आतिशबाजी नहीं की. इसके अलावा लड़का पक्ष ने लड़की पक्ष का भी फालतू खर्च नहीं कराया. लड़का पक्ष ने कहा, वो भी मेरा परिवार है, इसलिए उनका धन भी फिजूल खर्च नहीं करना है.

‘इससे अच्छा कोर्ट मैरिज ही कर लेते’ 
वहीं, सनातन संस्कृति के प्रचारक दीपक द्विवेदी का कहना है कि ये लोग फिजूलखर्ची से डर रहे थे तो इतना ताम-झाम करने की क्या जरूरत थी. इनको फिर टेंट भी नहीं लगवाना चाहिए था. कोर्ट मैरिज ही कर लेनी थी. ये किस पाखंडवाद की बात कर रहे हैं? ये लोग अपनी शादी में भगवान का आशीर्वाद नहीं ले रहे हैं. ये समाज को कौन सी दिशा देंगे? जो खुद ही समाज से अलग हो रहे हैं. भगवान श्रीराम की शादी में भी मंत्रों का उच्चारण हुआ था, पंडितों ने ही मंत्र पढ़े थे. इस शादी में न तो भंवरी पड़ी, न मंत्रों का उच्चारण हुआ, फिर इस शादी में भगवान गणेश, शंकर-गौरा, विष्णु  कैसे आशीर्वाद दिए?



Source link