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Satna News: भीम बहादुर किसी से पैसों की मांग नहीं करते लेकिन लोगों के स्नेह को ठुकराते भी नहीं. नेपाल में पहाड़ी क्षेत्र में बसे उनके गांव में खेती कठिन है, बर्फबारी होती है और आर्थिक चुनौतियां हमेशा बनी रहती हैं. ऐसे में यहां मिलने वाला आर्थिक सहयोग उनके लिए बड़ा सहारा बन जाता है.
सतना. मध्य प्रदेश के सतना में रात के सन्नाटे में जब पूरा मोहल्ला गहरी नींद में होता है, तब एक शख्स डंडा और सीटी के सहारे गलियों में भरोसे की पहरेदारी कर रहा होता है. शहर के वार्ड 22 में इन दिनों 56 वर्षीय भीम बहादुर गिरी का नाम सुरक्षा की पहचान बन गया है. नेपाल के रुकुम जिले वार्ड 11 से दिसंबर में सतना पहुंचे भीम बहादुर ने यहां निःशुल्क चौकीदारी की जिम्मेदारी उठाई और देखते ही देखते इलाके की तस्वीर बदल गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां पहले रात में चोरी की आशंका बनी रहती थी, वहीं अब मोहल्ले में सुकून का माहौल है. हर रात ठीक 11 बजे भीम बहादुर हाथ में डंडा और मुंह में सीटी लगाकर गश्त पर निकलते हैं. सुबह करीब 4 बजे तक वह लगातार पूरे वार्ड 22 में पैदल चक्कर लगाते रहते हैं. उनकी सीटी की आवाज अब लोगों के लिए डर नहीं बल्कि सुरक्षा का संकेत बन चुकी है. मोहल्ले के कई परिवारों का कहना है कि जब से वह आए हैं, तब से चोरी की घटनाएं लगभग बंद हो गई हैं और लोग निश्चिंत होकर सो पा रहे हैं.
भीम बहादुर इस काम के लिए किसी से तय शुल्क नहीं लेते. लोकल 18 से बातचीत में वह कहते हैं कि उनका उद्देश्य केवल लोगों की सुरक्षा है न कि पैसे. हालांकि मोहल्ले के लोग खुशी-खुशी उन्हें 100-200 रुपये दे देते हैं, जिससे उनका गुजारा चलता है. वह किसी से पैसे की मांग नहीं करते लेकिन लोगों के स्नेह को ठुकराते भी नहीं. पहाड़ी क्षेत्र में बसे उनके गांव में खेती कठिन है, बर्फबारी होती है और आर्थिक चुनौतियां बनी रहती हैं. ऐसे में यहां मिलने वाला सहयोग उनके लिए बड़ा सहारा बन जाता है.
परिवार की भी जिम्मेदारी
परिवार की बात करें, तो भीम बहादुर के दो बेटे और दो बेटियां हैं. दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है. बड़ा बेटा भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए बंगाल में चौकीदारी का काम करता है जबकि छोटा बेटा अपनी मां के साथ नेपाल में रहकर खेती संभालता है. वह बताते हैं कि परिवार की जिम्मेदारियों के बीच सेवा भावना ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है.
खास बात यह है कि भीम बहादुर ने अपने काम के लिए स्थानीय थाने से विधिवत अनुमति ली है. थाना प्रभारी ने उन्हें अपना संपर्क नंबर दिया है और किसी भी संदिग्ध या असामाजिक गतिविधि की सूचना तुरंत देने को कहा है. इससे उनकी चौकीदारी को औपचारिक समर्थन मिला है और मोहल्ले वालों का भरोसा और मजबूत हुआ है. इससे पहले भी वह बंगाल के कई जिलों, बिहार के बेगूसराय और यूपी के बनारस समेत कई शहरों में इसी तरह निःशुल्क चौकीदारी कर चुके हैं. अब सतना में उनका यह प्रयास सेवा और समर्पण की मिसाल बन गया है. वार्ड 22 के लोग उन्हें अपना रक्षक मानने लगे हैं, वह भी एक ऐसा रक्षक, जो बिना किसी स्वार्थ के रातभर जागकर दूसरों के घरों और उनकी नींद की हिफाजत करता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.