छतरपुर के बसारी गांव में प्यार में मिले धोखे के बाद मानसिक संतुलन खो चुके एक 30 वर्षीय युवक को 8 साल बाद जंजीरों से आजादी मिली है। युवक का नाम सोनू रैकवार है, जिसे हिंसक होने के कारण उसके ही गरीब परिवार ने सालों से जंजीरों में बांध कर रखा था। अब समाजसेवी डॉ. संजय शर्मा और महिला थाना पुलिस की संयुक्त पहल से उसे मुक्त कराकर इलाज के लिए ग्वालियर के मानसिक आरोग्यशाला भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। परिजनों के मुताबिक, सोनू कुछ साल पहले दिल्ली में मजदूरी करने गया था। वहां उसे एक युवती से प्रेम हो गया, लेकिन इस रिश्ते में उसे गहरा धोखा और बेवफाई मिली। इस सदमे से वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गया। जब वह गांव लौटा, तो गुमसुम रहने लगा और उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया। धीरे-धीरे उसकी मानसिक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वह हिंसक हो गया और लोगों को नुकसान पहुंचाने लगा। गरीबी के कारण नहीं हो सका इलाज, मजबूरन बांधी जंजीर
सोनू के पिता हरदास रैकवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और वे भिक्षावृत्ति कर अपना जीवन यापन करते हैं। पैसे की तंगी के कारण वे अपने जवान बेटे का इलाज नहीं करा सके। सोनू खुद को या दूसरों को कोई नुकसान न पहुंचा ले, इस डर से मजबूर पिता और परिजनों ने पिछले 8 सालों से उसे लोहे की जंजीरों में जकड़ कर रखा हुआ था। संजय दत्त की करता है एक्टिंग, अब जगी ठीक होने की उम्मीद
हैरानी की बात यह है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ होने और जंजीरों में बंधे रहने के बावजूद सोनू बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त का बड़ा फैन है और अक्सर उनकी एक्टिंग (नकल) करता है। मामले की जानकारी मिलने पर समाजसेवी डॉ. संजय शर्मा ने महिला थाना प्रभारी प्रतिभा श्रीवास्तव के सहयोग से उसे जंजीरों से मुक्त कराया। जिला अस्पताल में उसका मेडिकल परीक्षण करवाया गया है और उसे ग्वालियर भेजने की तैयारी है। डॉ. शर्मा का दावा है कि सही इलाज मिलने पर सोनू पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकेगा। 1500 मानसिक रोगियों को नया जीवन दे चुके हैं डॉ. शर्मा
समाजसेवी डॉ. संजय शर्मा पिछले कई सालों से मानसिक रोगियों के लिए फरिश्ता बने हुए हैं। वे अब तक 1500 से अधिक मानसिक रोगियों को इलाज के लिए ग्वालियर आरोग्यशाला भिजवा चुके हैं। इनमें से लगभग 1400 मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने परिवारों के पास लौट चुके हैं। अब सोनू के पिता को भी उम्मीद है कि उनका बेटा जल्द ही ठीक होकर घर लौटेगा।
Source link