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Thakur Baba Mandir: मध्य प्रदेश में स्थित इस मंदिर में मन्नत पूरी होने के बाद ठाकुर बाबा को जीवित घोड़ा चढ़ाने की परंपरा है, लेकिन श्रद्धा अनुसार लोग मिट्टी, तांबा, पीतल, चांदी, सोना के घोड़े भी चढ़ाते हैं. यही नहीं, ठाकुर बाबा को बिना सलामी दिए यहां से न तो कोई ट्रेन गुजर सकती है, न हाईवे से कोई वाहन. जानें महिमा…
Sagar News: सागर के जरूआखेड़ा में प्राचीन और प्रसिद्ध ठाकुर बाबा का मंदिर है, जो केवल सागर जिले के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. मन्नत पूरी होने के बाद ठाकुर बाबा को असली घोड़ा चढ़ाने की परंपरा है, लेकिन श्रद्धा के अनुसार मिट्टी, तांबा, पीतल, चांदी, सोना के भी घोड़े चढ़ाए जाते हैं. ठाकुर बाबा की महिमा ऐसी है कि यहां से ट्रेन सलामी देते हुए निकलती है. नेशनल हाईवे-934 से जो भी वाहन निकलता है, यहां रुक बगैर आगे नहीं बढ़ सकता. सदियों से ऐसी परंपरा चली आ रही है. ऐसा नहीं करने पर बड़ी अनहोनी की आशंका होती है, इसलिए यहां से गुजरने वाले लोग बाबा को प्रणाम करके ही आगे बढ़ते हैं.
उमा भारती ने चढ़ाया था जिंदा घोड़ा
2003 में मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती ने यहां पर प्रार्थना की थी. चुनाव होने के बाद जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं तब उन्होंने जिंदा सफेद रंग का घोड़ा ठाकुर बाबा के लिए भेंट किया था. ठाकुर बाबा मंदिर परिसर में मिट्टी, तांबा, पीतल के सैकड़ों घोड़े रखे हुए हैं. यह उनकी सवारी के रूप में भी जाना जाता है.
जिंदा मुर्गा छोड़ने की भी परंपरा
यहीं पर ठाकुर बाबा मंदिर के नीचे मानपाल बाबा का एक स्थान है, जहां आज भी लोगों की मनोकामना पूर्ण होने पर जिंदा मुर्गे चढ़ाए जाते हैं. यानी मुर्गों को यहां पर भेंट कर दिया जाता है. उसकी बलि नहीं होती. ठाकुर बाबा को भी लोग जीवित मुर्गा भेंट करते हैं. यही वजह है कि मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में मुर्गे घूमते पाए जाते हैं. यहां रोजाना दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. इसी मंदिर परिसर में हनुमान मंदिर, दुर्गाजी का मंदिर, शंकरजी का मंदिर भी है, जबकि राम दरबार एवं श्रीदेव हनुमान मंदिर निर्माणाधीन है. मंदिर परिसर का संचालन श्रीदेव ठाकुर बाबा मंदिर ट्रस्ट करता है.
कथा से लेकर शादी तक
मंदिर के पुजारी सुनील कुमार चौबे ने बताया कि यह ठाकुर बाबा का सिद्ध तीर्थ स्थल क्षेत्र है. यहां छोटी सी कथा से लेकर बड़े-बड़े शादी विवाह तक के आवेदन किए जाते हैं. यहां पर अमावस्या और पूर्णिमा को मेला लगता है. ठाकुर बाबा को मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धा अनुसार घोड़ा चढ़ाया जाता है. इसके अलावा मंदिर परिसर में दूसरे बाबा घाटोहिया, मनपाल, आशु माता के नाम से जिंदा मुर्गा छोड़े जाने की परंपरा भी है.
यहां पहुंचना आसान
मंदिर को लेकर बताया जाता है कि यह पहले रेलवे लाइन के पास था, लेकिन जब ट्रैक बिछाया गया तो बाबा को यहां पहाड़ी पर महुआ के पेड़ के नीचे चबूतरा बनाकर बैठा दिया गया था. बाद में उनकी मान्यता बढ़ती गई और अब भव्य मंदिर परिसर बन गया है. जरूआखेड़ा सागर मुख्यालय से करीब 30 km दूर है, जो खुरई बीना रोड पर स्थित है. यहां तक पहुंचाने का रास्ता सुगम है, क्योंकि यह टू लाइन हाईवे पर स्थित है.
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