Pollution of Narmada in 54 stations from Amarkantak to Gulf of Khambhat, pollution remains lowest in lockdown | अमरकंटक से खंभात की खाड़ी तक 54 स्टेशनों में नर्मदा के प्रदूषण पर नजर, लॉकडाउन में प्रदूषण रहा सबसे कम

Pollution of Narmada in 54 stations from Amarkantak to Gulf of Khambhat, pollution remains lowest in lockdown | अमरकंटक से खंभात की खाड़ी तक 54 स्टेशनों में नर्मदा के प्रदूषण पर नजर, लॉकडाउन में प्रदूषण रहा सबसे कम


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जबलपुर9 मिनट पहले

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  • प्रदूषण कन्ट्रोल बोर्ड मप्र के चेयरमैन श्री धाकड़ ने कहा- सुधार की कोशिशें जारी, लोग जागरूक बनें तो परिणाम बेहतर होंगे

लॉकडाउन काल में नदियों में प्रदूषण का स्तर सबसे कम रहा। नर्मदा में ही उद्मगम स्थल से लेकर खंभात की खाड़ी तक पाॅल्यूशन में एकदम कमी आई थी और अब तक इसका असर दिख रहा है। जनता जागरूक बने और अन्य पहलुओं पर थोड़ा ध्यान दिया जाए तो जल प्रदूषण में बेहतर से बेहतर सुधार किया जा सकता है। मप्र की जीवन रेखा नर्मदा में पाॅल्यूशन की माॅनीटरिंग के लिए प्रदूषण कन्ट्रोल बोर्ड 54 स्टेशनों पर विशेष नजर रख रहा है। इसके लिए पैरामीटर तय किये गये हैं, प्रदूषण नियंत्रण के लिए सार्थक कोशिश की जा रही है। राज्य प्रदूषण कन्ट्रोल बोर्ड के चेयरमैन महेन्द्र सिंह धाकड़ ने नगर आगमन पर अनौपचारिक चर्चा करते हुये यह बात कही।

श्री धाकड़ ने कहा कि नर्मदा के आसपास खाली जमीन में पौधा रोपण हो। जो खेतों में कीटनाशक का इस्तेमाल होता है उसमें सावधानी बरती जाए। कई पहलू हैं जिन पर नर्मदा स्वच्छता मिशन और जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके परिणाम निकट भविष्य में और बेहतर सामने आयेंगे। चर्चा के दौरान प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी पीएस बुंदेला भी मौजूद रहे। कोविड-19 का मेडिकल वेस्ट नुकसान नहीं पहुँचा सका

श्री धाकड़ ने कहा कि पूरे प्रदेश में जो भी कोविड-19 से संबंधित मेडिकल वेस्ट निकल रहा है उसका निष्पादन बेहतर तरीके से किया जा रहा है। अभी तक कोरोना काल में बरती गई सावधानी का परिणाम है कि किसी भी स्तर में अस्पतालों से निकला जैविक कचरा सामान्य घरों के कचरे से नहीं मिल सका है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और प्रदूषण कन्ट्रोल बोर्ड समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। जैविक कचरे से कोई भी व्यक्ति संक्रमण की चपेट में नहीं आया और इसको लेकर खास सावधानी बरती जा रही है।

सहायक नदियों में मानवीय बसाहट का दबाव – उन्होंने कहा कि नर्मदा की जो सहायक 19 नदियाँ हैं उनमें लगातार होने वाली बसाहट, शहरीकरण, अतिक्रमण जैसे मानीवय हस्तक्षेप का ज्यादा दबाव है। इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है। इनमें जल स्तर या बहाव तो कम हो ही रहा है साथ ही इनमें नुकसान हो रहा है। इन सहायक नदियों के लिए भी कोशिश राज्य स्तर पर की जा रही है। जल स्तर का नीचे जाना भी चिंता का विषय है। प्रशासन से वाटर लेबल डाउन होने को लेकर हम कहते हैं कि ज्यादा तालाब बनाएँ। स्टापडेम, छोटे बाँधों से लाभ हो सकता है।

जल स्रोतों से दूर हों डेयरियाँ – शहर में जो डेयरियाँ हैं उसके लिए जो गाइडलाइन है उसमें कन्ट्रोल बोर्ड हमेशा यही प्रयास कर रहा है कि किसी भी तरह से जल स्रोतों से ये डेयरियाँ दूर हों। इनको शहरी सीमा से अलग बसाये जाने को लेकर कई विभागों के बीच समन्वय की जरूरत है। जो मापदण्ड डेयरी के लिए तय किये गये हैं उनका पालन होना जरूरी है। वेटरनरी, नगर निगम, प्रशासन, उर्जा विभाग कई डिपार्टमेंट हैं जिनका सहयोग मिले तो इनको पूरी तरह से जल्द शहरी सीमा से बाहर किया जा सकता है जो प्रदूषण रोकने के लिहाज से अहम है।

15 साल पुराने वाहन का न हो रजिस्ट्रेशन

पीसीबी स्टेट चेयरमैन ने शहरी प्रदूषण पर कहा कि हमने ट्रांसपोर्ट विभाग से कहा कि 15 साल पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन ही न किया जाए। इस प्रक्रिया से शहर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण होगा। इसी तरह ध्वनि प्रदूषण पर रोक के लिए हर थाने में जरूरी उपरकण हों जो ध्वनि प्रदूषण की माॅनीटरिंग करें, खासकर ज्यादा शोर वाली परिस्थितियों में कर सकें। इसी तरह बस्तियों, काॅलोनियों में वायु प्रदूषण निर्माण गतिविधियों से होता है उसके लिए निर्माण की साइट में इनक्लोजर और शेड लगाना जरूरी है। इसका पालन होने पर काफी परिणाम बेहतर हो सकते हैं।



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