अमरकंटक में चंद्र ग्रहण पर उमड़ा जनसैलाब: नर्मदा तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने किया पुण्य स्नान; शुद्धिकरण के बाद खुले मंदिरों के पट – Anuppur News

अमरकंटक में चंद्र ग्रहण पर उमड़ा जनसैलाब:  नर्मदा तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने किया पुण्य स्नान; शुद्धिकरण के बाद खुले मंदिरों के पट – Anuppur News




पवित्र नगरी अमरकंटक में मंगलवार को साल के पहले चंद्र ग्रहण के अवसर पर भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। नर्मदा नदी के उद्गम स्थल पर हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ कमाने के लिए पवित्र स्नान किया। ग्रहण के दौरान पूरी नगरी धार्मिक अनुष्ठानों और मंत्रोच्चार से गुंजायमान रही। सूतक काल में बंद रहे देवालयों के द्वार चंद्र ग्रहण के चलते मंगलवार भोर की आरती के बाद से ही सूतक काल शुरू हो गया था। धार्मिक मान्यताओं और शास्त्र सम्मत परंपराओं का पालन करते हुए मुख्य नर्मदा मंदिर सहित अमरकंटक के सभी छोटे-बड़े मंदिरों के पट भक्तों के लिए बंद कर दिए गए थे। इस दौरान मंदिरों के भीतर केवल विशेष मानसिक जाप और अनुष्ठान किए गए। ग्रहण समाप्ति के बाद हुआ विशेष शुद्धिकरण शाम लगभग 6:47 बजे जैसे ही ग्रहण समाप्त हुआ, पूरी नगरी में शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। मंदिरों के गर्भगृहों को पवित्र नर्मदा जल से धोकर शुद्ध किया गया। इसके बाद भगवान का नए वस्त्रों से विशेष श्रृंगार किया गया और विधि-विधान से पूजन-अर्चन की गई। जैसे ही मंदिरों के द्वार दोबारा खुले, पूरी अमरकंटक नगरी जयकारों से गूंज उठी और भक्तों ने दर्शन के लिए कतारें लगा लीं। नर्मदा तट पर उमड़ा जनसैलाब और दीपदान धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के बाद पवित्र नदी में स्नान करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इसी विश्वास के साथ शाम ढलते ही नर्मदा के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रीवा से आए श्रद्धालु अखिलेश सिंह और अनिल पाण्डेय ने बताया कि ग्रहण के बाद नर्मदा स्नान का अनुभव अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी होता है। स्नान के बाद आयोजित सायंकालीन नर्मदा आरती में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए, जिससे पूरा तट दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। प्रशासन ने इस खगोलीय और धार्मिक घटना के दौरान उमड़ी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुगम दर्शन के कड़े इंतजाम किए थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो।



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