दिल्ली बैठक से एमपी में भूचाल! विजयवर्गीय का डांस वायरल, पटेल की भूमिका क्या?

दिल्ली बैठक से एमपी में भूचाल! विजयवर्गीय का डांस वायरल, पटेल की भूमिका क्या?


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दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल की मुलाकातों ने कैबिनेट विस्तार की अटकलें बढ़ा दीं हैं. वहीं कैलाश विजयवर्गीय का कैबिनेट में शामिल नहीं होकर, भगोरिया मेले में जाकर डांस करना कई संकेत दे रहा है. विपक्ष ने कैबिनेट बैठक से उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठाए हैं. तो दूसरी तरफ भाजपा इसे सामाजिक जुड़ाव बता रही है. इस बीच एक बार फिर से मंत्री मंडल में बदलाव की चर्चा जोर पकड़ रही है.

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एमपी की राजनीति में बड़ा बदलाव होने के संकेत हैं.

भोपाल. मध्य प्रदेश की सियासत में दिल्ली की एक बैठक ने नई हलचल पैदा कर दी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल की अलग-अलग मुलाकातों ने राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्मा दिया है. बताया जा रहा है कि यह मुलाकातें कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक बदलावों से जुड़ी हो सकती हैं. होली के बाद प्रदेश में बड़े फेरबदल की अफवाहें पहले से ही चल रही हैं और इन बैठकों ने इन्हें और हवा दे दी है. भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हैं क्योंकि दोनों ही प्रभावशाली नेता हैं और उनके दिल्ली दौरे को मुख्यमंत्री के साथ जोड़कर देखा जा रहा है. विपक्ष इसे सत्ता के आंतरिक संघर्ष का संकेत बता रहा है जबकि भाजपा इसे रूटीन चर्चा करार दे रही है.

इस बीच कैलाश विजयवर्गीय का भगोरिया उत्सव में आदिवासी नृत्य का वीडियो वायरल होकर विवादों में आ गया है. जिस दिन कृषि कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक थी, उस दिन विजयवर्गीय इंदौर में त्रिपुरा मुख्यमंत्री से मिल रहे थे जबकि प्रहलाद पटेल भोपाल में ही रुके रहे. यह दोनों मंत्री बैठक से अनुपस्थित थे जिसने सवाल खड़े कर दिए हैं. भगोरिया पर्व मालवा-निमाड़ का प्रमुख आदिवासी उत्सव है जहां विजयवर्गीय ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य किया. समर्थकों ने इसे सामाजिक जुड़ाव बताया लेकिन विपक्ष ने इसे जिम्मेदारी से बचने का बहाना कहा. दिल्ली मुलाकात के बाद यह घटनाक्रम एमपी की राजनीति में नए मोड़ की ओर इशारा कर रहा है जहां कैलाश और प्रहलाद की भूमिका कैबिनेट विस्तार में निर्णायक हो सकती है.

दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद बदल गए समीकरण 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एमपी के नेताओं की मुलाकातें हमेशा से महत्वपूर्ण रही हैं. हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शाह से मिलकर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और विकास योजनाओं पर चर्चा की. इसके बाद कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल की अलग-अलग मुलाकातें हुईं. सूत्रों के मुताबिक ये बैठकें कैबिनेट विस्तार और लोकसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने से जुड़ी हैं. विजयवर्गीय भाजपा के पुराने नेता हैं जिन्होंने इंदौर में मजबूत पकड़ बनाई है जबकि पटेल आदिवासी क्षेत्रों में प्रभावी हैं. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मुलाकातें होली के बाद होने वाले बदलावों का पूर्वाभास हैं.

भगोरिया वीडियो और विवाद
भगोरिया उत्सव में कैलाश विजयवर्गीय का नृत्य वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. आदिवासी समाज के साथ उनके इस जुड़ाव को कुछ ने सराहा तो विपक्ष ने इसे कैबिनेट बैठक से गैरहाजिरी का बहाना बताया. कृषि कैबिनेट बैठक में महत्वपूर्ण फैसले होने थे लेकिन दोनों मंत्री अनुपस्थित रहे. विजयवर्गीय इंदौर में त्रिपुरा मुख्यमंत्री मनिक साहा से मिले जबकि पटेल भोपाल में रहे. विपक्षी कांग्रेस ने कहा कि यह सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल है. भाजपा ने बचाव में कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी जनता से जुड़ाव बढ़ाती है.

सियासी अटकलें और संभावित बदलाव
दिल्ली मुलाकात के बाद एमपी में कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि विजयवर्गीय को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है जबकि पटेल आदिवासी वोट बैंक मजबूत करने में भूमिका निभा सकते हैं. होली के बाद फेरबदल में 5-7 नए चेहरे शामिल हो सकते हैं. भाजपा सूत्रों के अनुसार अमित शाह ने प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है. विपक्ष इसे सत्ता के आंतरिक कलह का संकेत बता रहा है.

विपक्ष का हमला और भाजपा का बचाव
कांग्रेस ने विजयवर्गीय की अनुपस्थिति को मुद्दा बनाते हुए कहा कि मंत्री सांस्कृतिक उत्सवों में व्यस्त हैं जबकि किसान संकट में हैं. भाजपा ने पलटवार किया कि विपक्ष अनावश्यक राजनीति कर रहा है. सांस्कृतिक जुड़ाव भाजपा की रणनीति का हिस्सा है खासकर आदिवासी क्षेत्रों में जहां पटेल जैसे नेता मजबूत हैं.यह घटनाक्रम एमपी की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत हो सकता है. होली के बाद कैबिनेट विस्तार में विजयवर्गीय और पटेल को बड़ी भूमिका मिल सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अमित शाह की मुलाकातें लोकसभा चुनावों से पहले संतुलन बनाने की कोशिश हैं. जनता के बीच यह चर्चा है कि क्या यह सत्ता के नए समीकरण हैं. आने वाले दिन स्पष्ट करेंगे कि कैलाश और प्रहलाद की भूमिका क्या होगी.



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