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Agriculture News: फूल आने के समय यह रोग (लूज स्मट) तेजी से सक्रिय होता है और दानों के निर्माण की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. इस रोग से प्रभावित बालियां सामान्य से पहले पकती हुई दिखाई देती हैं लेकिन उनमें दानों की जगह काले रंग का चूर्ण जैसा पदार्थ भरा रहता है.
सीधी. मध्य प्रदेश में मार्च का महीना गेहूं की फसल के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस समय अगेती गेहूं की फसल में फूल आने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जो उत्पादन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण चरण होता है. ऐसे में मौसम में अचानक बदलाव, तापमान में उतार-चढ़ाव और नमी की स्थिति फसल पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. इस दौरान गेहूं में लूज स्मट नामक बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, जो समय रहते नियंत्रण न होने पर भारी नुकसान पहुंचा सकती है. सीधी के वरिष्ठ कृषि अधिकारी संजय सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि यह रोग मुख्य रूप से गेहूं की बालियों को प्रभावित करता है. फसल पकने के समय बालियों में दानों की जगह काले रंग का पाउडर दिखाई देने लगता है. यह दरअसल फफूंद के बीजाणु होते हैं, जो हवा के माध्यम से अन्य स्वस्थ पौधों तक फैल जाते हैं. इस बीमारी का प्रमुख कारण स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस नामक फफूंद है, जो बीज के अंदर छिपकर रहता है और पौधे के बढ़ने के साथ सक्रिय हो जाता है.
उन्होंने कहा कि फूल आने के समय यह रोग तेजी से सक्रिय होता है और दानों के निर्माण की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. लूज स्मट से प्रभावित बालियां सामान्य से पहले पकती हुई दिखाई देती हैं लेकिन उनमें दानों की जगह काले चूर्ण जैसा पदार्थ भरा रहता है. हवा चलने पर यह पाउडर उड़कर अन्य पौधों को संक्रमित कर देता है. यदि समय पर रोकथाम न की जाए, तो यह रोग 20 से 30 प्रतिशत तक उत्पादन घटा सकता है.
बीज उपचार सबसे प्रभावी उपाय
संजय सिंह के अनुसार, इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय बीज उपचार है. बुआई से पहले प्रमाणित और उपचारित बीज का उपयोग करना चाहिए. यदि किसानों ने बिना बीजोपचार के बुआई कर दी है, तो वे खेत में स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस का प्रयोग कर सकते हैं. यह जैविक नियंत्रण एजेंट फफूंद के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है. इसके अलावा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या मैंकोजेब जैसे फफूंदनाशकों का छिड़काव भी लाभकारी साबित हो सकता है.
कृषि विभाग की किसानों को सलाह
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल की नियमित निगरानी करें, खेत में असामान्य बालियों को तुरंत नष्ट करें और रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें. सही समय पर वैज्ञानिक उपाय अपनाकर किसान लूज स्मट जैसी खतरनाक बीमारी से अपनी फसल को बचा सकते हैं. जागरूकता और सतर्कता ही बेहतर उत्पादन की कुंजी है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.