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Balaghat News: लालबर्रा जनपद पंचायत में पदस्थ असिस्टेंट इंजीनियर मीनाक्षी नागेश्वर ने कहा कि वर्किंग ऑवर्स 6 बजे खत्म हो जाते हैं. इसके बाद ही जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ ऑनलाइन मीटिंग रखते हैं. इस मीटिंग में वह कर्मचारियों के साथ अभद्रता करते हैं.
बालाघाट. आमतौर पर देखा जाता है कि अपनी मांगों को लेकर जनता ही सरकारी दफ्तरों या फिर नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन या आंदोलन करती है लेकिन बालाघाट से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां ग्राम पंचायत के कर्मचारियों से लेकर बड़े अधिकारी तक अपने सबसे बड़े अफसर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. मध्य प्रदेश पंचायत विभाग विकास विभाग के तमाम कर्मचारी और अधिकारी एकजुट होकर जनपद पंचायत बालाघाट के दफ्तर के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. उनकी मांग है कि जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ अपने व्यवहार में सुधार करें या फिर उनका यहां से तबादला करवाया जाए. लोकल 18 ने इस मामले में तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों से बातचीत की और समझने की कोशिश की आखिर आंदोलन करने की जरूरत क्यों पड़ी.
एक अधिकारी ने बताया कि मीनाक्षी तालाब और बलराम तालाब के लिए राज्य से एक लक्ष्य तय हुआ था. सबसे ज्यादा लक्ष्य खैरलांजी जनपद पंचायत को मिला. इस बीच मैंने और मेरे सहकर्मियों ने लक्ष्य को पूरा करने की काफी कोशिश की. इसमें किसानों को समझाना होता है लेकिन उस इलाके में सीमांत किसान हैं. ऐसे में कोई अपनी जमीन पर मीनाक्षी या बलराम तालाब नहीं बनवाना चाहता. बावजूद इसके लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूरी कोशिश की गई और लक्ष्य से थोड़ा पीछे रह गए. ऐसे में उन्होंने यानी जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ ने रहम नहीं किया और 32 दिन की सैलरी काट ली. जब वेतनभोगी का वेतन कटता है, तो पूरे परिवार को समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
वर्किंग ऑवर्स के बाद मीटिंग
जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ पर आरोप है कि वह वर्किंग ऑवर्स के बाद भी अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को परेशान करते हैं. दरअसल लालबर्रा जनपद पंचायत में पदस्थ असिस्टेंट इंजीनियर मीनाक्षी नागेश्वर का कहना है कि वर्किंग ऑवर्स 6 बजे खत्म हो जाते हैं. इसके बाद ही जिला पंचायत सीईओ ऑनलाइन मीटिंग रखते हैं. इस मीटिंग में वह किसी भी कर्मचारी के साथ अभद्रता करते हैं. यह एक दिन की बात नहीं है, वह हर दिन ऐसा करते हैं. नौकरी के अलावा एक जिम्मेदारी परिवार की भी होती है. ऐसे में पर्सनल लाइफ खत्म हो जाती है. अब वह चाहती हैं कि IAS सराफ अपना रवैया बदलें या फिर सरकार उन्हें यहां से बदल दे.
कर्मचारियों से करते हैं अभद्रता
जनपद पंचायत सीईओ वृंदावन मीना का कहना है कि जिला पंचायत सीईओ अपने ही कर्मचारियों से अभद्रता करते हैं. अगर वह व्यवहार अच्छा करेंगे, तो वे लोग भी अच्छे मन से काम करेंगे. उनका कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी, तब तक आंदोलन चलता रहेगा. उनकी मांग है कि छुट्टी वाले दिन बिना जरूरत के समीक्षा बैठक न बुलाई जाए. अब मध्य प्रदेश पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा संगठन ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है.
न फोन उठाया और न की मुलाकात
इस मामले में लोकल 18 ने जिला पंचायत सीईओ से मुलाकात की कोशिश की. हमने उनके ही विभाग के अधिकारियों ने जो आरोप लगाया है, उसपर IAS अभिषेक सराफ का पक्ष जानना चाहा लेकिन 40 मिनट इंतजार करने के बाद उन्होंने रिपोर्टर से मिलना ठीक नहीं समझा. वहीं फोन लगाने पर उन्होंने फोन भी नहीं उठाया. ऐसे में उनके तरफ से कोई जवाब नहीं आया.
IAS अफसर का विवादों से पुराना नाता
यह पहला मौका नहीं है, जब IAS अभिषेक सराफ पर अभद्रता के आरोप लगे हों. इससे पहले वकीलों ने उनपर एक वकील से अभद्रता का आरोप लगाया था. आपको बताते चलें कि उन्होंने IIT कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उन्होंने पहले से ही तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सर्वेंट बनना है. वह कॉलेज प्लेसमेंट में भी नहीं बैठे थे. फाइनल ईयर से पहले से ही वह UPSC की पढ़ाई में जुट गए. उन्होंने UPSC इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा (ESE) 2013 में भी अखिल भारतीय 6वीं रैंक हासिल की. वह लगातार तैयारी करते रहे. साल 2017 में 402वीं रैंक और फिर साल 2018 में 248वीं रैंक लेकर IRS बने लेकिन उन्होंने एक साल फिर जमकर मेहनत की और 2020 में 8वीं रैंक हासिल कर IAS बने.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.