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Ujjain santon wali holi : उज्जैन में बाबा महाकाल की नगरी में होली पर संतों का भव्य नगर प्रवेश हुआ. श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा में पंच-परमेश्वर संतों ने एकता, सेवा और संस्कार का संदेश दिया.खास बात यह है कि यहां आज संतो वाली होली भी होगी.
उज्जैन : विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन धर्म और आस्था की नगरी उज्जैन में होली के पावन अवसर पर आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत दृश्य देखने को मिला. शिप्रा तट स्थित श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा में पंच-परमेश्वर संतों का भव्य नगर प्रवेश आयोजित किया गया. लगभग दस वर्षों के अंतराल के बाद संतों की पारंपरिक पेशवाई निकाली गई, जिसने पूरे शहर को भक्तिमय वातावरण से भर दिया. ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच संतों का स्वागत किया गया. मार्ग भर श्रद्धालु फूलों की वर्षा करते नजर आए.
साधु-संत ध्वजों के साथ आगे बढ़े, मानो धर्म और संस्कृति की जीवंत झांकी साकार हो उठी हो. सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे. पंच-परमेश्वर संतों ने समाज को एकता, सेवा और संस्कार का संदेश दिया. यह नगर प्रवेश वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेला की तैयारियों की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. बताया जाता है कि करीब दो शताब्दियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी आस्था और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है, जो उज्जैन की आध्यात्मिक पहचान को और सशक्त बनाती है.
देशभर से उज्जैन आएंगे संत-महंत
उज्जैन आए संत महात्मा मे, भ्रमणशील मंडल के महंत दुर्गादास, महंत अद्वैतानंद, महंत राम नौमी दास, सचिव हंस मुनि, महंत कोठारी सत्यानंद, मुकामी राम मुनि, मुकामी देवी दास सहित निर्वाण संतों का अखाड़े में आगमन हुआ. महंत सत्यानंद ने बताया कि संतों का भव्य प्रवेश हुआ है और आने वाले दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में संत उज्जैन पहुंचेंगे.
आज होली उत्सव मनाएंगे संत
धर्म नगरी उज्जैन में नगर प्रवेश के साथ पहुंचे संत पूरे देश में सनातन संस्कृति का संदेश देने के उद्देश्य से यहां आए हैं. होली के पावन पर्व पर बुधवार, 4 मार्च को श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा में विशेष आयोजन रखा गया है. सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक साधु-संत और महंत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होली मनाएंगे. ढोल-नगाड़ों, भजन और गुलाल के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय रहेगा. इस खास आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है और बड़ी संख्या में लोग संतों के साथ इस आध्यात्मिक होली के साक्षी बनने पहुंच रहे हैं.
पंच-परमेश्वर परंपरा
देश के सभी प्रमुख अखाड़ों में “पंच-परमेश्वर” नाम की एक विशेष व्यवस्था होती है. इसके सदस्य उस शहर में पहुंचते हैं, जहां आगे चलकर कुंभ या सिंहस्थ मेला आयोजित होना होता है. इसी क्रम में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेला की तैयारियों को देखते हुए देशभर के कई बड़े अखाड़ों के पंच-परमेश्वर उज्जैन आए हैं.
ये संत यहां आठ दिनों तक रुकेंगे और मेले के दौरान साधु-संतों के लिए रहने, भोजन, सुरक्षा और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की जानकारी लेंगे. वे यह सुनिश्चित करेंगे कि आयोजन भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो. उज्जैन में समीक्षा पूरी करने के बाद पंच-परमेश्वर आगे नासिक के लिए रवाना होंगे, जहां भविष्य में कुंभ मेला आयोजित होना है. बताया जाता है कि इससे पहले ये संत वर्ष 2015 में भी उज्जैन आ चुके हैं.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें