मेडल सेरमनी के दौरान किसने किया संजू सैमसन को इग्नोर

मेडल सेरमनी के दौरान किसने किया संजू सैमसन को इग्नोर


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सचिन तेंदुलकर के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी तकनीक और मानसिक मजबूती पर काम किया, जिसका फल आज पूरे भारत के सामने है.  मेडल देते समय गले मिलना या न मिलना एक व्यक्तिगत क्रिया हो सकती है, लेकिन संजू ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया है, जो किसी भी मेडल या गले लगने से कहीं बड़ा सम्मान है.

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मेडल सेरमनी में संजू सैमसन को गले लगाने से किसने किया इग्नोर?

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 8 मार्च, 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है, जब टीम इंडिया ने न्यूज़ीलैंड को 96 रनों से हराकर अपना तीसरा टी20 वर्ल्ड कप खिताब जीता.  इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े नायक संजू सैमसन रहे, जिन्होंने न केवल पूरे टूर्नामेंट में बल्ले से आग उगली बल्कि ‘मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ का प्रतिष्ठित खिताब भी अपने नाम किया. पूरी दुनिया ने संजू का लोहा माना पर शायद आईसीसी चीफ को उनका रन बनाना रास नहीं आया.

संजू सैमसन ने मैदान पर अपने बल्ले से उन सभी आलोचनाओं का जवाब दे दिया है जो उनकी निरंतरता पर सवाल उठाते थे. सचिन तेंदुलकर के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी तकनीक और मानसिक मजबूती पर काम किया, जिसका फल आज पूरे भारत के सामने है.  मेडल देते समय गले मिलना या न मिलना एक व्यक्तिगत क्रिया हो सकती है, लेकिन संजू ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया है, जो किसी भी मेडल या गले लगने से कहीं बड़ा सम्मान है.

मेडल सेरेमनी और जय शाह के बर्ताव पर चर्चा

सोशल मीडिया पर मेडल वितरण समारोह के दौरान बीसीसीआई सचिव जय शाह और संजू सैमसन के बीच के एक पल को लेकर काफी चर्चा हो रही है.  कुछ प्रशंसकों का दावा है कि जय शाह ने अन्य खिलाड़ियों को गले लगाया लेकिन संजू को केवल मेडल पहनाया. मेडल सेरमनी की तस्वीरों में ये तो साफ है कि अंजाने में ही सहीं आईसीसी चीफ संजू से सिर्फ हाथ मिलकर ही रह गए.  हालांकि, सच्चाई और संदर्भ को समझना आवश्यक है:मेडल सेरेमनी अक्सर एक तय प्रोटोकॉल के तहत होती है और कई बार समय की कमी या व्यक्तिगत तालमेल के कारण अधिकारियों का व्यवहार अलग-अलग दिख सकता है. जय शाह ने अतीत में संजू के प्रदर्शन की सराहना की है और उनके शानदार 97 रनों के बाद उनसे मिलने की खबरें भी आई थीं.

संजू सैमसन: टीम इंडिया की खिताबी जीत के शिल्पकार

संजू सैमसन के लिए यह वर्ल्ड कप किसी सपने के सच होने जैसा रहा.  टूर्नामेंट की शुरुआत में प्लेइंग इलेवन का हिस्सा न होने के बावजूद, जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने इसे दोनों हाथों से लपका. संजू ने 5 मैचों में 80.25 की औसत और 199.38 के स्ट्राइक रेट से कुल 321 रन बनाए. उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ 97, इंग्लैंड के खिलाफ 89 और फाइनल में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 89 रनों की मैच जिताऊ पारियां खेलीं.
वह विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह के बाद टी20 वर्ल्ड कप में ‘मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ बनने वाले तीसरे भारतीय खिलाड़ी बने.

संजू ने इस वर्ल्ड कप में वो किया जिसका सपना वो साल 2024 से देख रहे थे और उसकी तैयारी कर रहे थे. सालों की मेहनत और धैर्य ने सैमसन को उस मुकाम पर पहुंचाया है जहां से वो अब सबसे लिए एक उदाहरण बन गए है और इस बात से उनको कुछ फर्क नहीं पड़ता कि कोई हाथ नहीं मिला रहा या गले नहीं लगा रहा.



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