नलखेड़ा12 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
- आगर जिले के गांव आमला की विशेषता बन गई ग्रामीणों की मुसीबत
किसी गांव के दो सांसद हो और दो विधायक, चार तहसीलदार सहित गांव दो जनपद पंचायत, चार थाने, दो ग्राम पंचायतों में विभाजित हुआ हो। यह सुनने में जरूर अटपटा लगता है, लेकिन आगर जिले के ग्राम आमला की यही हकीकत है। इंदौर-कोटा मार्ग स्थित करीब 1300 की आबादी वाला यह गांव दो अलग-अलग हिस्से में बंटा हुआ है। वर्षों से यहां के ग्रामीण दो सांसद एवं दो विधायकों के लिए मतदान कर रहे है। आमला गांव की ऐसी विचित्र स्थिति के कारण मतदाताओं के साथ ही वोट मांगने वाले प्रत्याशी भी असमंजस में रहते हैं। प्रचार करने वाले प्रत्याशियों व अन्य नेता भी नहीं जान पाते कि उनके लोकसभा, विधानसभा क्षेत्र में आने वाले मतदाता कौन हैं? संशय से बचने के लिए दोनों लोकसभा व दोनों विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक दलों के प्रत्याशी गांव के हर घर में जाकर वोट मांगते हैं। खास बात तो यह है कि अजीब तरीके से हुए इस परिसीमन को सुधारने के लिए अब तक कोई उचित पहल भी नहीं हो सकी है। दरअसल विधानसभा उप चुनाव के दौरान आगर विधानसभा में होने जा रहे उपचुनाव में इस गांव के करीब 27 प्रतिशत मतदाताओं को छोड़, शेष 73 प्रतिशत मतदाता वोटिंग कर सकेंगे। आगर से करीब 18 किमी दूर स्थित ग्राम आमला ऐसे स्थान पर है जिसका एक हिस्सा आगर जनपद में आता है तो दूसरा सुसनेर जनपद में। तीसरा हिस्सा नलखेड़ा जनपद तो चौथा हिस्सा बड़ौद जनपद में आता है। चार तहसीलों में बंटे इस गांव के तहसीलदार एवं पटवारी भी अलग-अलग हैं। गांव की गलियां भी अलग -अलग तहसील का प्रतिनिधित्व करती है। एक ही गांव में रहने के बाद भी दो भाई अलग-अलग तहसील में रहते हैं। उनके विधायक और सांसद भी अलग हैं तो वोटर आईडी, राशन कार्ड भी अलग-अलग है।