हरदा8 घंटे पहले
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हरदा। प्राचार्य विद्यार्थियों काे स्मार्ट फाेन देते हुए।
- पढ़ाई के दाैरान गुरु द्वारा दी गई सीख- काबिल बनाे ताे ओराें की मदद जरूर कराे काे बनाया मूल मंत्र, उज्जैन में एमपीआरडीए में सहायक महाप्रबंधक हैं राजेंद्र
समाज में कई लाेग आज भी अपने गुरुजनों की सीख और उनके दिए संस्कार काे आधुनिक युग में भी जीवन में आत्मसात कर जरूरतमंद लाेगाें की मदद कर रहे हैं। ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जा सके। यहां के पॉलीटेक्निक काॅलेज में 1983 में पढ़े पूर्व छात्र राजेंद्र कुरील ने जरूरतमंद छात्र-छात्राओं की मदद के लिए अपनी पिता की स्मृति में 8 नए मोबाइल दिए हैं। गुरुवार काे प्राचार्य विजय तिवारी, लेक्चरर आरके दाेगने, आबिद अली ने इन मोबाइलों का वितरण किया।
काेराेना से बचने इन दिनाें पॉलीटेक्निक काॅलेज में भी ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। कॉलेज में 45 गरीब विद्यार्थी ज्यादातर गैरहाजिर रहते थे। प्राचार्य वीके तिवारी ने पूर्व विद्यार्थी से उनकी मदद की अपील की। हरदा ओल्ड बाॅयज एसोसिएशन ने 1.10 लाख रुपए खर्च कर 20 स्मार्ट फाेन दिए। 23 सितंबर काे भास्कर में छपी यह खबर साेशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। इससे मदद का सिलसिला आगे बढ़ा।
सिलसिला लगातार चलता रहे इसलिए काबिल बनो तो दूसरों की मदद करो
उज्जैन से मोबाइल पर राजेंद्र कुरील ने विद्यार्थियों से कहा कि, उन्होंने संस्था व गुरुजनों का कर्ज चुकाने की काेशिश की है। उनके पिता व गुरुजनों ने यही सिखाया कि वे जब भी जीवन में काबिल बनकर किसी मुकाम पर पहुंच जाएं ताे ओराें की यथासंभव मदद करें। जिससे यह सिलसिला आगे बढ़ता रहे। उन्होंने इच्छित मंजिल पाने के लिए अनुशासित रहते हुए समय का पाबंद रहने व खुद के प्रति कठाेर बनने की बात कही।
ये मदद नहीं कर्ज चुकाया : कुरील
राजेंद्र कुरील ने कहा कि पॉलीटेक्निक से 1983 में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। 1988 में जबलपुर से बीई किया। अभी आरईएस में एसडीओ हूं। इन दिनाें प्रतिनियुक्ति पर उज्जैन में एमपीआरडीए में सहायक महाप्रबंधक हूं। भास्कर में खबर पढ़ी, जिसमें मेरी ही संस्था के जरूरतमंद छात्र-छात्राओं काे स्मार्ट फाेन की जरूरत का जिक्र था। मैंने उस बैच के दाेस्त आरके दाेगने से संपर्क कर प्राचार्य विजय तिवारी के खाते में राशि ट्रांसफर की। मेरे स्व. कुंजीलाल सेवक (कुरील) की प्रेरणा से उन्हीं की स्मृति में 8 नए मोबाइल के रुप में किसी की मदद का माैका मिला।