भोपाल के आदमपुर छावनी में सूखे कचरे से कोयला बनेगा। यहां पर पीपीपी मोड में 220 करोड़ रुपए से टोरिफाइड चारकोल प्लांट स्थापित किया गया है। इसके जरिए 400 टन सूखे कचरे का निपटारा हो सकेगा। इसका ट्रायल भी शुरू कर दिया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल पर खरा उतरने जा रहा है। शहर से निकलने वाले सूखे कचरे के पूरे निपटारे के टारगेट को पूरा करने के लिए आदमपुर खंती में नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन (एनटीपीसी) के माध्यम से टोरिफाइड चारकोल प्लांट लगा है। इसका ट्रायल रन प्रारंभ कर दिया गया है। इस प्लांट के माध्यम से प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे से टोरिफाइड चारकोल का निर्माण किया जाएगा। यहां निर्मित टोरिफाइड चारकोल को एनटीपीसी स्वयं के उपयोग में लेगी। शुक्रवार को निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने इसका निरीक्षण भी किया। निगम ने 800 टन कचरा दिया
निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने बताया कि 12 अक्टूबर 2021 को आदमपुर में सूखे कचरे से टोरिफाइड चारकोल प्लांट के निर्माण एवं संचालन के लिए एग्रीमेंट किया गया था। इस प्लांट में रोजाना 400 टन सूखे कचरे से टोरिफाइड चारकोल का निर्माण किया जाएगा। प्लांट के ट्रायल रन के लिए 3 दिवस में निगम द्वारा 800 टन सूखा कचरा टोरिफाइड चारकोल प्लांट को दिया गया है। पूरे ट्रायल रन में करीब 1800 टन सूखे कचरे को प्रोसेस किया जाएगा। निगम को बचत होगी
पीपीपी मोड पर लगभग 220 करोड़ रुपए की लागत से आदमपुर छावनी में 15 एकड़ भूमि पर एनटीपीसी ने यह प्लांट स्थापित किया है। प्लांट के संचालन से निगम को सूखे कचरे के निष्पादन पर व्यय होने वाली राशि की बचत होगी और नया लेगसी तैयार नहीं हो पाएगा। बनारस के बाद भोपाल में ही लगा है प्लांट
निगम कमिश्नर जैन को एनटीपीसी के अधिकारियों ने बताया कि बनारस के बाद भोपाल में देश का दूसरा ऐसा शहर है, जिसने टोरिफाइड चारकोल प्लांट स्थापित करने के लिए अनुबंध किया था। बनारस के प्लांट के संचालन के अनुभव एवं कार्य व्यवहार से सीख लेकर भोपाल के संयंत्र में अपग्रेड टेक्नालॉजी का उपयोग किया गया है। यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश में अपने किस्म का पहला प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से नगर निगम हर रोज सूखे कचरे का निपटारा कर सकेगा।
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