इंदौर में चिकित्सा विज्ञान की महत्वपूर्ण विधा रेडियोलॉजी के जनक विल्हेम कॉनराड रोंजन की जयंती (27 मार्च) पर ‘विकिरण सुरक्षा दिवस’ मनाया गया। इस मौके पर रेडियोलॉजी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने एक्स-रे की उपयोगिता के साथ-साथ उससे जुड़े खतरों और सुरक्षा उपायों पर भी जोर दिया। कार्यक्रम का आयोजन सोसाइटी ऑफ इंडियन रेडियोग्राफर और मध्यप्रदेश रेडियोग्राफर संघ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। वक्ताओं ने कहा कि रोंजन ने एक्स-रे जैसी क्रांतिकारी खोज को मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने न तो इसका पेटेंट कराया और न ही इससे आर्थिक लाभ लिया, बल्कि नोबेल पुरस्कार की राशि भी दान कर दी। “लाखों जिंदगियां बचीं, लेकिन जोखिम भी बड़ा” भारतीय विकिरण संरक्षण परिषद एवं भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई के सदस्य शिवाकांत वाजपेयी ने कहा कि एक्स-रे जहां जीवनदायी है, वहीं जरा सी लापरवाही गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने बताया कि रेडिएशन का प्रभाव न सिर्फ व्यक्ति बल्कि आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ सकता है। सुरक्षा संसाधनों पर सवाल कार्यक्रम में रेडियोग्राफर्स ने सरकार पर सुरक्षा साधनों की अनदेखी का आरोप लगाया। बताया गया कि मध्यप्रदेश में रेडियोग्राफी कर्मियों को मात्र 50 रुपए प्रतिमाह रेडिएशन अलाउंस दिया जा रहा है, जो देश में सबसे कम है। ऐसे में कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। 1995 से मनाया जा रहा ‘विकिरण सुरक्षा दिवस’ उल्लेखनीय है कि ‘विकिरण सुरक्षा दिवस’ मनाने की शुरुआत 27 मार्च 1995 को इंदौर में मध्यप्रदेश रेडियोग्राफर संघ द्वारा की गई थी। इसमें शिवाकांत वाजपेयी, विनोद तिवारी, मानसिंह चौधरी, शरद जैन और डॉ. एम.एस. गुजराल की अहम भूमिका रही। ये रहे कार्यक्रम में शामिल कार्यक्रम में शासकीय कैंसर चिकित्सालय से शरद जैन, गगन मोदी, पवन अहीरवार, अंचल सिसोदिया, रेडियोग्राफर अजय सोनी सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ रेडियोग्राफर मानसिंह चौधरी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन विनोद तिवारी ने किया।
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