जबलपुर CEO का ‘अनोखा टेस्ट’, पास होने पर बोर्ड पर चमकती है फोटो, फेल हुए तो कार्रवाई

जबलपुर CEO का ‘अनोखा टेस्ट’, पास होने पर बोर्ड पर चमकती है फोटो, फेल हुए तो कार्रवाई


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Jabalpur News: जलबपुर जिला पंचायत में सीईओ अभिषेक गहलोत की पहल ‘उत्कृष्टता के प्रतिबिंब’ बोर्ड से सरपंचों को सम्मान और लापरवाह पंचायतों पर सख्त कार्रवाई का फार्मूले की खूब चर्चा हो रही है. इस पहल से काफी उत्साह है. जानें…

Jabalpur News. सरकारी दफ्तरों की पहचान अक्सर फाइलों के ढेर और सुस्त माहौल से होती है, लेकिन जबलपुर जिला पंचायत कार्यालय की तस्वीर बदली-बदली नजर आ रही है. कार्यालय के बाहर लगा एक विशेष बोर्ड ‘उत्कृष्टता के प्रतिबिंब’ आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है. यह बोर्ड उन सरपंचों, सचिवों और अधिकारियों की कहानी बयां कर रहा है, जिन्होंने अपने गांव के विकास के लिए जी-जान लगा दिया है.

दरअसल, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने जिले के अधिकारियों और सरपंचों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए यह पहल की है. आमतौर पर अच्छा काम करने वालों को फाइलों में शाबाशी मिलती है, लेकिन यहां उनके नाम और फोटो को सार्वजनिक डिस्प्ले बोर्ड पर लगाया गया है.

योजनाओं से नंबरों के आधार पर चयन
सीईओ अभिषेक गहलोत ने बताया, हम चाहते हैं कि बेहतर काम करने वालों को सम्मान मिले. फरवरी माह में जिन पंचायतों और ब्लॉकों ने सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने में टॉप किया, उन्हें हमने ‘उत्कृष्टता के प्रतिबिंब’ बोर्ड पर जगह दी है. इसी तरह हर महीने प्रतियोगिता कराई जाती हैं. जबलपुर की 542 पंचायतों में चल रही योजनाओं जैसे… प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा, पेंशन और जल जीवन मिशन की बारीक मॉनिटरिंग की जाती है.

चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी
हर पंचायत के काम को 100 में से नंबर दिए जाते हैं. सबसे ज्यादा प्रतिशत हासिल करने वाले सरपंच और सचिव को बोर्ड पर जगह मिलती है, जिसके चलते फरवरी माह में कुंडम जनपद ने बाजी मारी थी. इसके चलते वहां के सीईओ को विशेष स्थान मिला. वहीं खास बात ये कि इसमें कई महिला सरपंचों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने विकास के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा किया.

लापरवाही पर ‘डंडा’, अच्छे काम पर ‘इनाम’
प्रशासन सिर्फ पीठ थपथपाने तक सीमित नहीं है, जहां एक ओर अच्छा काम करने वालों का सम्मान हो रहा है, वहीं पिछड़ने वाली अंतिम 5 पंचायतों पर कड़ी नजर रखी जा रही है. सीईओ के मुताबिक, अगर काम में देरी तकनीकी है तो उसे सुलझाया जाता है, लेकिन लापरवाही पाए जाने पर सीधे कार्रवाई की जा रही है. जिला पंचायत की यह पहल न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा रही है, बल्कि गांवों में विकास की नई इबारत भी लिख रही है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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